1857 की क्रांति में अंग्रेजी सेना के छक्के छुड़ा देने वाली वीरांगना ऊदा देवी की प्रपौत्री राजेश्वरी देवी का शुक्रवार सुबह केके अस्पताल में निधन हो गया। वह 78 वर्ष की थीं और लंबे समय से लिवर की बीमारी से जूझ रही थीं। उनका अंतिम संस्कार बैकुंठ धाम में किया गया। उनका इलाज निजी अस्पताल के आईसीयू में चल रहा था। उनकी देखभाल उनके पुत्र कमल कुमार कर रहे थे। गत 29 जून को राजेश्वरी देवी को केके अस्पताल में भर्ती कराया गया। 25 जुलाई को उनकी सर्जरी होनी थी। लेकिन उससे पहले ही तबीयत खराब हो गई।
कमल ने बताया कि मां 30 जून को सिकंदर बाग में होने वाले कार्यक्रम की तैयारियों में व्यस्त थीं, लेकिन इससे पहले ही बीमार पड़ गईं। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश पासी जागृति मंडल के अंतर्गत महाराजा लाखन पासी पर 28 सितंबर और महाराजा बिजली पासी पर 6 अप्रैल को भी कार्यक्रम कराए जाते हैं। क्योंकि राजेश्वरी देवी मंडल की अध्यक्ष हैं, इसलिए सारा कामकाज वही संभालती हैं।
24 से अधिक अंग्रेजों को उतारा था मौत के घाट
वीरांगना ऊदा देवी ने 1857 की क्रांति में सिकंदरबाग में अंग्रेजी सेना के छक्के छुड़ा दिए थे। जब अंग्रेजों ने अवध पर हमला किया तो इस्माइलगंज में ब्रिटिश टुकड़ी से लड़ते हुए उनके पति वीरगति को प्राप्त हो गए। ब्रिटिश सेना ने लखनऊ के सिकंदर बाग में भारतीय सैनिकों पर हमला बोल दिया। ऐसे में पुरुषों की वेशभूषा धारण कर ऊदा देवी और उनकी बटालियन ने सेना को सिकंदर बाग के द्वार पर ही रोक दिया।
लड़ाई के समय ऊदा देवी अपने साथ एक बंदूक और कुछ गोला-बारूद लेकर एक पीपल के पेड़ पर चढ़ गईं थीं। उन्होंने वहीं से 24 से भी ज्यादा ब्रिटिश सैनिकों को मार गिराया। मगर एक अंग्रेज सैनिक ने उन्हें देख लिया और उनपर गोली चला दी। गोली लगते ही ऊदा देवी पेड़ से नीचे गिर पड़ीं।