प्रदेश की शीर्ष ब्यूरोक्रेसी में मुख्य सचिव के बदलने की अटकलें काफी दिनों से चल रही हैं। राजस्व परिषद चेयरमैन की तैनाती में देरी से इस अटकलबाजी को फिर हवा मिलने लगी है।
जानकार बताते हैं कि यदि सरकार को मुख्य सचिव बदलने की ही रणनीति सही नजर आए तो पूर्व के कुछ मुख्य सचिवों की तरह आरके तिवारी को राजस्व परिषद भेजने का मुफीद विकल्प होगा। यदि ऐसा नहीं होता है तो प्रदेश में कार्यरत 1985 या 1986 बैच के आईएएस अधिकारियों में से किसी को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।
मो. इफ्तेखारुद्दीन : 1985 बैच के हैं और तिवारी के बाद सबसे वरिष्ठ हैं। वर्तमान में उप्र. राज्य सड़क परिवहन निगम के चेयरमैन की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
आलोक सिन्हा : 1986 बैच के आईएएस अधिकारी हैं और कृषि उत्पादन आयुक्त के अलावा अपर मुख्य सचिव ऊर्जा व अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत जैसे महत्वपूर्ण विभाग देख रहे हैं।
मुकुल सिंघल : 1986 बैच के हैं और लगभग तीन वर्ष से अपर मुख्य सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक की जिम्मेदारी देख रहे हैं। एक दिसंबर, 2020 से राजस्व परिषद के सदस्य भी हैं। वे परिषद के वरिष्ठम सदस्य हैं।
कुमार कमलेश : 1986 बैच के हैं और अपर मुख्य सचिव नियोजन, कार्यक्रम क्रियान्वयन व विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की जिम्मेदारी देख रहे हैं। 30 जून को वे रिटायर हो जाएंगे। ऐसे में उन्हें बोर्ड में भेजने की कोई संभावना नजर नहीं आती।
अवनीश अवस्थी : 1987 बैच के हैं और मुख्यमंत्री के चुनिंदा करीबी अफसरों में शामिल हैं। अपर मुख्य सचिव गृह, गोपन व कारागार के साथ यूपीडा के सीईओ हैं।