रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का कहना है कि वह वार से नहीं डरते, पर वार ऐसा नहीं होना चाहिए कि कुछ दिन बाद खुद पर शर्म आए।
आखिर बॉक्सिंग में भी वार के नियम होते हैं। बकौल राजा, बिलो बेल्ट वार नहीं होना चाहिए, पुरूषार्थी ऐसा नहीं करते। इसी सिलसिले में वह अपनी बेहद प्रिय रचना रामधारी सिंह दिनकर की ’रश्मिरथी’ के कुछ लाइनें पढ़ते हैं।
देवराज, हम जिसे जीत सकते न बाहु के बल से
क्या है उचित, उसे मारें हम न्याय छोड़ कर छल से
राजा भैया रोज की तरह शनिवार को भी अपने 8 कालिदास मार्ग में कुंडा के लोगों से मिल रहे थे। सीओ हत्यांकांड में सीबीआई जांच में बेदाग निकलने की खुशी रघुराज प्रताप सिंह उर्फ उनके चेहरे पर साफ पढ़ी जा सकती है।
मिलने वालों में कुछ की दिलचस्पी यह जानने में थी कि शुक्रवार को मुलायम सिंह ने क्या कहा, पर राजा हल्की मुस्कान के साथ जवाब टाल देते।
‘अमर उजाला’ ने इसी दौरान उनसे मुलाकात कर यह जानने की कोशिश की मंत्री पद से इस्तीफा देने और सीबीआई जांच से बरी होने के बीच के पांच महीने के दौरान कैसे समय बिताया और क्या नया अनुभव रहा।
राजा भैया का कहना, उन्हें पहले दिन से विश्वास था कि बेदाग निकलूंगा वरना सीबीआई जांच से लेकर नार्को टेस्ट की मांग खुद क्यों करता।
बच्चा-बच्चा जानता है सच
मलाल तो सिर्फ इस बात का है कि राजनीतिक दलों के जिम्मेदार लोग बेबुनियाद आरोप गढ़ने और साजिश में शामिल होने को अपना कौशल मानने लगे हैं। प्रतापगढ़ का बच्चा-बच्चा जानता है कि कैसे और किन स्थितियों में सीओ को गोली लगी, लेकिन एफआईआर में राजनीति समा गई। पर वार में दम नहीं था।
शायद यही कारण था कि इन पांच महीने में मानसिक तनाव में नहीं रहा। कर नहीं तो डर नहीं। फिर भी सीबीआई तो सीबीआई ठहरी। 2 दिन में 20 घंटे पूछताछ हुई। कुछ नहीं मिला तो नार्को टेस्ट की बात चली जिसे मैने सहर्ष स्वीकार ही नहीं किया, खुद जांच की मांग की।
दो बड़े विभागों के मंत्री थे, पर इन पांच महीनों में खाली रहने पर दिन कैसे बिताए, संबंधी सवाल पर राजा भैया ने बताया कि आश्चर्यजनक तो यह था कि मंत्री रहने के समय जितने लोग मिलते थे, उससे डयोढ़े लोग इस बीच मिलने आए।
मैं बेसिक शिक्षा मंत्री रामगोविन्द चौधरी का दिल से धन्यवाद देना चाहूंगा कि बेहद करीबी न होने के बावजूद उन्होंने न केवल विधानसभा के भीतर बल्कि बाहर भी सच कहने की जुर्रत की। खाली समय था, इसलिए परिवार व बच्चों के बीच ज्यादा समय बिताया।
हां, एक किताब भी पढ़ी ’हिमालयन ब्लंडर।’ ब्रिगेडियर जे. पी. डाल्वी द्वारा लिखी इस किताब में भारत-चीन युद्ध के समय तत्कालीन शीर्ष नेतृत्व द्वारा सुरक्षा मामलों में बरती गई लापरवाही का जिक्र है।
दिलचस्प किताब है। कहते हैं कि पांच महीनों के दौरान मेरा सर्वाधिक हौसला बढ़ाया नौजवानों ने। राजा भैया युवा दल तक बना डाला। करीब 40 हजार सदस्य हैं जो सोशल नेटवर्किग साइट के जरिए सक्रिय रहते हैं।
यूपी ने दी थी ऊर्जा
वाराणसी के यूपी कालेज के छात्रों ने जिस जोशोखरोश के साथ अपने कालेज में मेरा कार्यक्रम करवाने की कोशिश की, उसका मैं मुरीद हुआ। संभवत: अगस्त के अंत में छात्रों के बुलावे पर यूपी कालेज जाउंगा। बातचीत के दौरान वह यह बताना नहीं भूलते कि एक बार फिर ’रश्मिरथी’ पढ़ी, उसने एक बार फिर ऊर्जा दी।