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Lucknow News: स्टार्टअप के सहारे रैंक बढ़ा ली, सेंटर की हालत सुधारना भूला बीबीएयू

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लखनऊ। बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय में स्टार्टअप और इन्क्यूबेशन सेंटर के सहारे संस्थान ने अपनी रैंकिंग में सुधार तो किया, मगर विद्यार्थियों को इसका फायदा नहीं मिल सका। तीन साल पहले स्टार्टअप को पंख देने के लिए शुरू हुए सेंटर की हालत अब भी जस की तस है।
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बीबीएयू के पास इस समय नैक में ए प्लस-प्लस की ग्रेडिंग है। इसने तीन साल में राजधानी के किसी भी दूसरे संस्थान के मुकाबले केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। पांच श्रेणियों में स्थान बनाते हुए ओवरआल 58वां स्थान हासिल किया है। विश्वविद्यालय की श्रेणी में बीबीएयू को 33वां और प्रबंधन की श्रेणी में 86वां स्थान मिला है। फॉर्मेसी की श्रेणी में 21वां, जबकि विधि की श्रेणी में 10वां स्थान मिला।
एनआईआरएफ रैंकिंग के लिए निरीक्षण नहीं होता। संस्थान द्वारा भरी गई सूचना और प्रमाणपत्रों के आधार पर ही रैंकिंग जारी की जाती है। विश्वविद्याल को अन्य संसाधन और सुविधाओं के साथ ही विद्यार्थियों के लिए स्टार्टअप की व्यवस्था का फायदा भी मिला, मगर यह व्यवस्था सिर्फ कागजों तक ही सीमित है।
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स्टार्टअप से होता विद्यार्थियों को फायदा

विश्वविद्यालयों में स्टार्टअप को बढ़ावा देने का मकसद उनकी रचनात्मकता और नवाचार के आधार पर नया उद्योग विकसित करना है। इन्क्यूबेशन सेंटर से विद्यार्थियों के विचार को विकसित करने में मदद दी जाती है। इस तरह से विद्यार्थी खुद का व्यवसाय खड़ा कर पाते हैं।
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