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Lucknow News: बारिश ने खोली नालों की सफाई में धांधली की पोल

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लखनऊ। महज चार घंटों की बारिश में हुए जलभराव ने नाला सफाई के नाम पर खर्च किए गए करीब 15 करोड़ रुपये की धांधली की पोल खोल दी। इससे पहले चार अगस्त को भी हुई सीजन की पहली बारिश में जलभराव हुआ था। इससे पता चलता है कि नालों की सफाई का काम जमीन पर कम कागजों पर ज्यादा हुआ है। अभी भी कई इलाकों में नाले कचरे से पटे हैं।
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शहर में छोटे, बड़े और मझोले मिलाकर कुल 1301 नाले हैं। इनकी सफाई का काम नगर निगम के तीन विभाग मिलकर करते हैं। एक मीटर से कम चौड़े नालों यानी छोटे नालों की सफाई का काम नगर निगम का स्वास्थ्य विभाग कराता है। एक मीटर से अधिक और करीब दो मीटर तक चौड़े नालों की सफाई निगम का अभियंत्रण विभाग कराता है। यह काम ठेके पर कराया जाता है। जो नाले दो मीटर से अधिक चौड़े हैं उनकी सफाई निगम का आरआर विभाग खुद मशीनों के जरिए करता है। नाला सफाई के लिए इस बार करीब 15 करोड़ का बजट पास हुआ था। जलभराव के बाद भी ठेकेदारों को भुगतान किया जा रहा है।

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कागज पर साफ हुए नाले, मौके पर पटे

अलीगंज में सेक्टर-के वाली मेन रोड पर नाला एक मीटर से कम चौड़ा है। इस आध नाले पर कब्जा है और जो आधा खुला है वह कचरे से पटा है। यही वजह है कि रविवार को बारिश के दौरान सड़क पर दो फीट से अधिक पानी था। इस रोड पर बसी पीएंडटी कॉलोनी, सीएसआई कॉलोनी में पानी भर गया। करीब चार घंटे बाद पानी निकल सका। यहां पर बडा नाला कचरे से पटा है। उसके सामने ठेले खोमचे लगाने वाले नाले के अंदर ही सामान रखते हैं। यही हाल मड़ियांव की बसंत विहार कॉलोनी का है। नाले की सफाई नहीं कराए जाने से यहां सड़क पर तीन-तीन फीट पानी भर रहा है। पानी भरने से गाड़ियां भी खराब हो रही हैं। जानकीपुरम में यही हाल रहा। सफाई ठीक से न होने से इतना पानी सड़क पर जमा हुआ कि गाड़ियां आधी से अधिक डूब गईं।
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साफ नहीं हुए एक मीटर से कम चौड़े नाले
करीब साल भर पहले नगर निगम ने अलीगंज सहित कई इलाकों मेन रोड की सफाई का काम निजी कंपनी रैमकी को दिया है। अनुबंध के तहत रैमकी को झाड़ू लगाने के साथ ही नालियां व एक मीटर तक चौड़े नालों की सफाई का काम भी करना है। रैमकी ने न सफाई की और न ही निगम के स्वास्थ्य विभाग ने। अमर उजाला ने इस विवाद पर खबर भी प्रकाशित की थी लेकिन जिम्मेदारों ने कागजी खानापूरी कर मामले को दबा लिया।



कोट
नालों की सफाई का जो भी काम ठेके पर हुआ है उसका भुगतान जांच के बाद ही होगा। यदि कहीं से यह शिकायत मिली कि सफाई का काम नहीं हुआ तो जिम्मेदारी तय की जाएगी। एक मीटर से कम चौड़े नालों की सफाई पर संंबंधित अधिकारियों से रिपोर्ट ली जाएगी।
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गौरव कुमार, नगर आयुक्त
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