रेलवे विजिलेंस अब उन सभी अत्याधुनिक तकनीकों को इस्तेमाल करेगी जो सीबीआई अपनी जांच में उपयोग करती है। इतना ही नहीं रेलवे के भ्रष्ट व दागी कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतें भी ऑनलाइन दर्ज होंगी।
जिस पर रेलवे विजिलेंस को 15 दिन के भीतर कार्रवाई करनी होगी। इस संबंध में रेलवे बोर्ड ने अपने विजिलेंस विभाग को दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं।
बड़ी संख्या में यात्री और विभागीय कर्मचारी भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए रेलवे विजिलेंस को शिकायत करते हैं। लेकिन विभाग महज गलत दस्तावेज और कर्मचारियों से अधिक रुपये की बरामदगी के आधार पर मामला पंजीकृत कर अपनी कार्रवाई करता है।
नतीजतन कई बार साक्ष्यों के अभाव में आरोपी कर्मचारी बहाल हो जाते हैं। इससे बचने के लिए विजिलेंस अपनी जांच प्रक्रिया को और मजबूत बनाएगी ताकि रंगे हाथ पकड़े जाने वाले कर्मचारी छूट न सकें।
विजिलेंस विभाग शिकायतों की रिकॉर्डिंग का डाटाबेस भी तैयार करेगा। शिकायत मिलने के बाद उसकी जांच संबंधित जोनल और उत्पादन इकाईयों को तत्काल भेजी जाएगी। इन शिकायतों पर विभाग को आरोपी के खिलाफ 15 दिन के भीतर कार्रवाई करनी होगी।
अगर विभाग 15 दिन के भीतर कार्रवाई नहीं करेगा तो विजिलेंस मुख्यालय एक रिमांडर भेजेगा। उस रिमांडर पर भी 15 दिन के भीतर कार्रवाई न होने पर रेलवे विजिलेंस संबंधित अधिकारी को प्रतिकूल प्रविष्टि जारी करेगी।
उत्तर रेलवे मुख्यालय के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी नीरज शर्मा का कहना है कि रेलवे विजिलेंस शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया आधुनिक बना रही है। ताकि आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके।