अगर आईआरएमएस के लिहाज से अधिकारियों की ट्रेनिंग हुई तो उन्हें हर क्षेत्र में विशेषज्ञता की जरूरत होगी। ऐसे में प्रशिक्षण की अवधि बढ़ जाएगी। ऐसे में अधिकारियों को करीब डेढ़ साल में हर क्षेत्र में विशेषज्ञता कैसे हासिल कराई जा सकेगी। इसका सीधा असर उनके कामकाज और यात्री सुविधाओं पर पड़ेगा।
वहीं, एक अन्य प्रोफेसर का कहना है कि आईआरएमएस से ट्रेनिंग का पूरा शिड्यूल व फॉर्मेट प्रभावित होगा। रेलवे बोर्ड को आईआरएमएस लाने से पहले एक ब्ल्यू प्रिंट तैयार करना था। जिसके आधार पर रेलवे अधिकारियों की ट्रेनिंग, कोर्स और अवधि तय किया जाता। पुणे स्थित संस्थान के एक प्रोफेसर ने बताया कि अधिकारियों की उनके कार्य क्षेत्र के हिसाब से विभिन्न संस्थानों में ट्रेनिंग दी जाती है। अब आईआरएमएस से ये व्यवस्थाएं गड़बड़ा जाएंगी।
- इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ मैकेनिकल एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, जमालपुर
- इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ सिविल इंजीनियरिंग (इरीसिन), पुणे
- इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (इरीन), नासिक
- इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ सिग्नल इंजीनियरिंग एंड टेलीकम्युनिकेशन , सिकंदराबाद
- इंडियन रेलवे ट्रैक मशीन्स ट्रेनिंग सेंटर, प्रयागराज
- इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंशियल मैनजमेंट (इरिफेम), हैदराबाद
- नेशनल एकेडमी ऑफ इंडियन रेलवे (नाइर), वडोदरा
- नेशनल रेल एंड ट्रांसपोर्टेशन इंस्टीट्यूट (एनआरटीआई), वडोदरा