फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रेलवे के नाराज अफसर बोले, सरकार ने बिना फीडबैक व ब्लू प्रिंट के कर दिया आठ काडरों का विलय

Sun, 05 Jan 2020 05:10 PM IST
ishwar ashish नीरज ‘अम्बुज’, अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
विज्ञापन

रेलवे के ट्रैफिक, वित्त, कार्मिक, स्टोर समेत आठ काडरों के विलय से बने इंडियन रेलवे मैनेजमेंट सर्विस (आईआरएमएस) का अधिकारियों की ट्रेनिंग पर भी असर पड़ेगा। पहले अधिकारियों को उनके कार्य क्षेत्र के हिसाब से विशेषज्ञता हासिल कराने के लिए रेलवे के विभिन्न संस्थानों में ट्रेनिंग दी जाती थी। रेलवे के अधिकारी से लेकर बोर्ड के सदस्य अब इस बात से आशंकित है कि ट्रेनिंग का फॉर्मेट, कोर्स, शिड्यूल और अवधि क्या रखी जाए।

विज्ञापन


आईआरएमएस के गठन से सभी रेलवे जोनों के अधिकारियों में भारी नाराजगी है। इसे सोशल मीडिया और खतों के जरिये रेलमंत्री पीयूष गोयल और रेलवे बोर्ड के चेयरमैन वीके यादव से जता रहे हैं। शनिवार को अधिकारियों ने कहा, जब नई ट्रेन शुरू करनी होती है तो यात्रियों तक से फीडबैक लिया जाता है। मगर सरकार ने इतना बड़ा फैसला लेने से पहले अपने अधिकारियों तक से फीडबैक लेना और उन्हें इस बाबत जानकारी देना भी उचित नहीं समझा। बस सर्जिकल स्ट्राइक की तरह काडरों का विलय कर दिया।

रेलवे अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए देश में आठ प्रमुख संस्थान हैं। मैकेनिकल इंजीनियरों की ट्रेनिंग जमालपुर (बिहार) में, सिविल इंजीनियरों की पुणे, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरों की नासिक और अकाउंट अफसरों की हैदराबाद में ट्रेनिंग होती है। इसी तरह अन्य संस्थानों में अलग-अलग विधाओं से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाता है। जब इन संस्थानों के प्रोफेसरों से बातचीत की गई तो उनमें से एक प्रोफेसर ने कहा कि अभी अधिकारियों को उनके कार्य क्षेत्र में विशेषज्ञता दिलाने के साथ अन्य काम सिखाने के लिए करीब डेढ़ साल का प्रशिक्षण दिया जाता है।

विज्ञापन

मात्र डेढ साल में हर क्षेत्र में कैसे बनेंगे विशेषज्ञ

अगर आईआरएमएस के लिहाज से अधिकारियों की ट्रेनिंग हुई तो उन्हें हर क्षेत्र में विशेषज्ञता की जरूरत होगी। ऐसे में प्रशिक्षण की अवधि बढ़ जाएगी। ऐसे में अधिकारियों को करीब डेढ़ साल में हर क्षेत्र में विशेषज्ञता कैसे हासिल कराई जा सकेगी। इसका सीधा असर उनके कामकाज और यात्री सुविधाओं पर पड़ेगा।

वहीं, एक अन्य प्रोफेसर का कहना है कि आईआरएमएस से ट्रेनिंग का पूरा शिड्यूल व फॉर्मेट प्रभावित होगा। रेलवे बोर्ड को आईआरएमएस लाने से पहले एक ब्ल्यू प्रिंट तैयार करना था। जिसके आधार पर रेलवे अधिकारियों की ट्रेनिंग, कोर्स और अवधि तय किया जाता। पुणे स्थित संस्थान के एक प्रोफेसर ने बताया कि अधिकारियों की उनके कार्य क्षेत्र के हिसाब से विभिन्न संस्थानों में ट्रेनिंग दी जाती है। अब आईआरएमएस से ये व्यवस्थाएं गड़बड़ा जाएंगी।
विज्ञापन

इन संस्थानों में होती है ट्रेनिंग

- इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ मैकेनिकल एंड इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, जमालपुर
- इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ सिविल इंजीनियरिंग (इरीसिन), पुणे
- इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग (इरीन), नासिक
- इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ सिग्नल इंजीनियरिंग एंड टेलीकम्युनिकेशन , सिकंदराबाद

- इंडियन रेलवे ट्रैक मशीन्स ट्रेनिंग सेंटर, प्रयागराज
- इंडियन रेलवे इंस्टीट्यूट ऑफ फाइनेंशियल मैनजमेंट (इरिफेम), हैदराबाद
- नेशनल एकेडमी ऑफ इंडियन रेलवे (नाइर), वडोदरा
- नेशनल रेल एंड ट्रांसपोर्टेशन इंस्टीट्यूट (एनआरटीआई), वडोदरा
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें