रेलवे स्टेशन पर मास्क पहने पुलिसकर्मी और अन्य कर्मचारी
- फोटो : सोशल मीडिया
रेलवे प्रशासन द्वारा बनवाए गए मास्क को लगातार लगाए रहने से रेलकर्मियों का दम घुट रहा है। ऐसी कई शिकायतें लखनऊ मंडल कार्यालय तक पहुंची हैं। लॉकडाउन लागू होने के बाद रेलवे प्रशासन ने वर्कशॉप में सैनिटाइजर, मास्क और पीपीई किट बनवाने का काम शुरू कर दिया है।
इसी क्रम में उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल के आलमबाग स्थित कैरिज एंड वैगन वर्कशॉप में भी सैनिटाइजर, मास्क और पीपीई किट बनाने का काम शुरू किया गया। जिसकी आपूर्ति रेलवे के विभागों में की गई। सेफ्टी डिपार्टमेंट के एक रेलकर्मी ने बताया कि मास्क थ्री लेयर है, लेकिन यह इतना मोटा है कि उसमें हवा की आवाजाही ही नहीं हो पाती।
इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के एक कर्मी ने बताया कि पर्दे वाले कपड़े से मास्क बना दिया गया है। यह साइज में भी बड़ा है और आंख तक ढक लेता है। मुश्किल से घंटेभर लगाने के बाद इस मास्क में दम घुटने लगता है। इतना ही नहीं, मास्क को बांधने वाली डोरी भी बार-बार खुल जाती है। इससे काम करते वक्त दिक्कतें होती हैं।
आरपीएफ ने ढंकवाया मुंह
चारबाग रेलवे स्टेशन और लखनऊ जंक्शन पर पुष्पक व लखनऊ मेल से उतरने वाले यात्रियों को आरपीएफ ने मास्क पहनने को कहा। वहीं, लखनऊ से दिल्ली जाने वाली गोमती एक्सप्रेस में जिन यात्रियों ने मास्क नहीं पहन रखा था, उन्हें रुमाल या गमछे से मुंह ढंकवाने के बाद ही यात्रा की अनुमति दी गई।
उत्तर रेलवे के सीपीआरओ दीपक कुमार ने बताया कि मास्क बनाने के लिए वर्कशॉप में मौजूद कपड़े का इस्तेमाल किया गया है। कुछ दिक्कतें हो सकती हैं, लेकिन मास्क को पूरी तरह खराब कहना गलत होगा। जो भी समस्याएं हैं, उन्हें ठीक करवाया जाएगा।