रेलवे अपने सभी कर्मचारियों से अब हर साल 31 मार्च से पहले उनकी संपत्ति का ब्यौरा भरवाएगा। इसमें उन्हें न सिर्फ अपने नाम की, बल्कि पत्नी और बच्चों के नाम जमा धन और संपत्ति का विवरण भी देना होगा।
साथ उसे नौकरी के पहले पैतृक और अन्य तरह की संपत्ति की जानकारी देनी होगी। रेलवे बोर्ड के उपनिदेशक स्थापना शैलेंद्र मोदी ने इस संबंध में सभी जोनल मुख्यालयों के महाप्रबंधकों को निर्देश जारी कर दिए हैं।
माना जा रहा है कि रेलवे इस पहल से मलाईदार पदों पर तैनाती के वक्त अकूत बेनामी दौलत बनाने वाले अपने कर्मचारियों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर रहा है।
रेलवे बोर्ड के इस निर्देश के बाद लखनऊ सहित सभी रेल मंडलों के कर्मचारियों के बीच हड़कंप मच गया है। विशेषकर टीटीई, टीसी, रेल आरक्षण क्लर्क, बुकिंग क्लर्क और वेतन व लेखा सहित कमाई वाले पदों पर बैठे कर्मचारियों की नींद उड़ गई है।
हर माह हजारों रुपये की काली कमाई करने वाले कई कर्मचारियों ने गोमतीनगर और इंदिरानगर सहित कई पॉश इलाकों में आलीशान बंगले तक बना लिए हैं।
उनके पास महंगी कार और बैंक में लाखों रुपये जमा है। भर्ती घोटाले में बर्खास्त रेलवे कर्मचारी बेदीलाल के पास भी गोमतीनगर और आशियाना में लाखों रुपये का मकान है। इसकी भनक रेलवे तक को नहीं लगी थी।
तीन प्रारूपों में देना होगा विवरण
रेल कर्मचारियों को तीन प्रारूप में अपना ब्यौरा हर साल 31 मार्च तक देना होगा। इसमें उनकी रेलवे में नौकरी से पहले की अर्जित की गई पैतृक व अन्य संपत्ति, पत्नी और बच्चों के नाम की संपत्ति, उनके बैंक खाते में जमा धनराशि, सभी तरह के बचत पत्र का विवरण देना होगा।
इतना ही नहीं उनके पास कौन-सी मोटरसाइकिल या कार है यह भी बताना होगा। कर्मचारियों को यह सूचनाएं अपने सेक्शन अधिकारी या फिर सेक्शन अभियंता को देना होगा।
उनके माध्यम से ही कर्मचारियों को ब्यौरा उनके अनुभाग स्तर पर एकत्र होकर वेतन व लेखा अनुभाग के पास पहुंचेगा। विवरण में दर्ज सूचनाओं के गलत पाए जाने पर रेलवे कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई भी होगी।