बछरांवा में हुई वीभत्स ट्रेन दुर्घटना में रेलवे और प्रशासन की कलई बुरी तरह से खुल गई है। रेलवे मृतकों के लिए कफन तक नहीं जुटा पाया।
बुलेट ट्रेन चलाने जैसे महात्वाकांक्षी दावे करने वाला रेलवे बछरांवा की ट्रेन दुर्घटना में बुरी तरह से नाकाम दिखा। सुबह करीब 9 बजे हुई इस दुर्घटना के करीब डेढ़ घंटे बीत जाने के बाद भी रेलवे की तरफ से कोई बड़ा अधिकरी मौके पर नहीं पहुंच सका।
11 बजे के बाद ही रेलवे और प्रशासन की तरफ से कोई राहत पहुंच पाई थी। हादसे के बाद बचाव कार्य में भी रेलवे के हाथ-पांव फूलते दिखे।
घटनास्थल पर और बछरांवा के सरकारी अस्पताल में जिन लोगों की मौत हुई रेलवे उनके लिए कफन का इंतजाम नहीं कर पाया।
शाम 4 बजे तक करीब 30 लोगों की मौत ही पुष्टि हो चुकी थी। इन लोगों में से 10 लोगों की पहचान उनके परिवार द्वारा कर ली गई थी। इन 10 परिजनों ने मृतकों के लिए कफन की व्यवस्था कर दी थी बाकी के शव बिना कफन के खुले में ही पड़े रहे।
जिन 10 लोगों की पहचान की गई थी उनमें से सबसे ज्यादा पांच लोग रायबरेली के। 3 लखनऊ के और दो लोग अमेठी के हैं। उम्मीद है कि बाकी मृतकों के परिजन शाम और देर रात तक यहां पहुंच जाएंगे।