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रेलवे कर्मी व महिला की संदिग्ध हालात में मौत, जानें क्या रही वजह...

Fri, 24 Nov 2017 01:32 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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डेमो
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लखनऊ कृष्णानगर के प्रेमनगर में बृहस्पतिवार दोपहर बंद कमरे में रेलवेकर्मी ओमप्रकाश (55) और पड़ोस में रहने वाले बबलू कश्यप की पत्नी मीना की रहस्यमय हालात में जलकर मौत हो गई। आसपास के लोगों ने कमरे से धुआं निकलता देखा तो हड़कंप मच गया। दरवाजा तोड़ने पर दोनों जलते हुए मिले। पानी डालकर आग बुझाई गई लेकिन तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी।
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इंस्पेक्टर अंजनी कुमार पांडेय का कहना है कि दोनों खुद को देवर-भाभी बताते थे। इंस्पेक्टर ने बताया कि ओमप्रकाश रेलवे में कारपेंटर था और मूलरूप से मकबूलगंज का रहने वाला था। उसके परिवार में पत्नी शिवरानी के अलावा बेटे सुधांशु, सौरभ, गौरव और बेटी कोमल हैं। छह महीने से वह परिवार को छोड़कर आशा के मकान में किराये पर रह रहा था।

मीना कश्यप उसके पड़ोस में रहती है। उसका पति बबलू भी रेलवे में काम करता है। उसके दो बेटे रवि और दीपक व दो बेटियां रश्मि और रजनी हैं। रश्मि की शादी हो चुकी है जबकि रजनी की 30 नवंबर को शादी होनी है। मीना ने ही ओमप्रकाश को देवर बताते हुए किराये पर कमरा दिलाया था। दोपहर करीब ढाई बजे मीना बेटी की शादी का कार्ड बांटने की बात कहकर घर से निकली थी।
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इंस्पेक्टर ने बताया कि ओमप्रकाश रेलवे में कारपेंटर था और मूलरूप से मकबूलगंज का रहने वाला था। उसके परिवार में पत्नी शिवरानी के अलावा बेटे सुधांशु, सौरभ, गौरव और बेटी कोमल हैं। छह महीने से वह परिवार को छोड़कर आशा के मकान में किराये पर रह रहा था। मीना कश्यप उसके पड़ोस में रहती है। उसका पति बबलू भी रेलवे में काम करता है।

उसके दो बेटे रवि और दीपक व दो बेटियां रश्मि और रजनी हैं। रश्मि की शादी हो चुकी है जबकि रजनी की 30 नवंबर को शादी होनी है। मीना ने ही ओमप्रकाश को देवर बताते हुए किराये पर कमरा दिलाया था। दोपहर करीब ढाई बजे मीना बेटी की शादी का कार्ड बांटने की बात कहकर घर से निकली थी।
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खुदकुशी या हत्या में उलझी पुलिस

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शाम करीब चार बजे मकान के पास ही कांग्रेसी नेताओं की बैठक हो रही थी। वहां इलाके के लोग भी मौजूद थे। किसी ने ओमप्रकाश के कमरे से धुआं उठते देखकर मकान मालकिन आशा को सूचना दी। आशा मौके पर पहुंची और दरवाजे को धक्का दिया तो वह भीतर से बंद मिला।

उन्होंने ओमप्रकाश को कई आवाजें दीं लेकिन भीतर से कोई जवाब नहीं मिला। इस बीच आसपास के लोग एकत्र हो गए। दरवाजा तोड़ा गया तो भीतर का नजारा देखकर हड़कंप मच गया। भीतर एक चारपाई पड़ी थी जिसमें आग लगी थी। चारपाई पर लेटा व्यक्ति जल रहा था। पास ही जमीन पर एक व्यक्ति जलता हुआ पड़ा था।

लोगों ने पुलिस को सूचना देने के साथ ही पानी डालकर आग बुझाई लेकिन दोनों को बचाया नहीं जा सका। शवों की शिनाख्त ओमप्रकाश और मीना कश्यप के रूप में हुई। जानकारी पाकर आए परिवारीजनों में रोना-पीटना मच गया। फॉरेंसिक टीम और फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट ने घटनास्थल का मुआयना कर साक्ष्य एकत्र किए हैं।

कमरे में क्या हुआ? क्या ओमप्रकाश और मीना के बीच कोई झगड़ा हुआ और ओमप्रकाश ने उसकी हत्या के बाद उसे व खुद को आग लगा दी। या फिर दोनों ने एक साथ खुदकुशी की अथवा अग्निकांड महज एक हादसा था? पुलिस इसकी पड़ताल करने में जुटी है। मकान मालकिन और वहां रहने वाले किरायेदारों ने बताया कि मीना अक्सर ओमप्रकाश से मिलने उसके कमरे में आती थी और काफी देर तक रहती थी। ओमप्रकाश अपने परिवार को छोड़कर मीना के घर के पास क्यों रह रहा था? इस बारे में भी इलाकाई लोगों में तरह-तरह की चर्चा है। लोगों का कहना था कि दोनों के बीच प्रेम संबंध थे।
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