छापेमारी के लिए पहुंची क्राइम ब्रांच की टीम।
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रेल टिकट का अवैध कारोबार तेजी से फल-फूल रहा है। एक ओर प्रतिबंधित सॉफ्टवेयर का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा है वहीं दूसरी ओर तत्काल टिकटों में सेंधमारी भी नहीं रुक रही है। रेलवे के अवैध टिकट बनाने वालों के खिलाफ इन दिनों क्राइम ब्रांच की टीम धरपकड़ कर रही है। ऐसे ही टिकट दलालों पर कार्रवाई के लिए रविवार को लखनऊ आरपीएफ की क्राइम ब्रांच ने रायबरेली की टीम के साथ खीरों में रविवार को संचालित रफी ट्रैवल्स नामक साइबर कैफे में छापा मारा। मौके से 1.87 लाख के 271 टिकट, लैपटॉप समेत काफी सामान मिला, जिसे टीम ने अपने कब्जे में ले लिया।
खीरों प्रतिनिधि के अनुसार कस्बे में अवैध टिकट बनाए जाने की सूचना पर लखनऊ आरपीएफ की क्राइम ब्रांच ने 24 सितंबर को भी एक साइबर कैफे संचालक के खिलाफ कार्रवाई की थी। रविवार को फिर लखनऊ आरपीएफ की क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर यशवंत सिंह और थाना जीआरपी रायबरेली के प्रमोद कुमार अवस्थी की संयुक्त टीम ने खीरों कस्बे में संचालित रफी ट्रैवल्स नामक साइबर कैफेे पर छापा मारा। यहां टीम को कैफे संचालक मोहम्मद रफी की आईडी से सात टिकट बने हुए मिले। अन्य पाँच आईडी के बारे में पता नहीं चल सका, क्योंकि लैपटॉप चालू नहीं किया जा सका।
इंस्पेक्टर यशवंत सिंह ने बताया कि कैफे संचालक को हिरासत में लेकर रेलवे चौकी बछरावां पहुंचाया गया। उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर न्यायालय में पेश किया जाएगा। बताया कि कार्रवाई के दौरान जो लोग दुकानें बंद करके भागे हैं, उनके बारे में भी पता कराया जा रहा है। टीम में चौकी इंचार्ज बछरावां अरविंद कुमार तिवारी, पंकज सिंह, दिनेश मौर्या आदि शामिल रहे।
आरपीएफ क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर यशवंत सिंह ने बताया कि रफी ट्रैवल्स का मालिक रफी अहमद करीब दो साल से तत्काल टिकट की दलाली कर रहा था। उसके पास से आईआरसीटीसी की एजेंट आईडी भी मिली है। वह आईआरसीटीसी एजेंट होने के बाद भी पर्सनल यूजर आईडी से टिकट बना रहा था। उसके पास से पांच पर्सनल यूजर आईडी, 271 रेल टिकट बरामद हुए हैं जिनकी कीमत 1.87 लाख है।
...तो इसलिए दलाली कर रहे एजेंट
रेलवे आम यात्रियों के लिए तत्काल कोटे की बुकिंग सुबह 10 बजे शुरू करता है जबकि आईआरसीटीसी एजेंट के लिए तत्काल कोटे की बुकिंग 15 मिनट बाद शुरू होती है। अब जब 15 मिनट बाद आईआरसीटीसी एजेंट बुकिंग शुरू करते हैं तो उन्हें वेटिंग में ही टिकट मिलते हैं। यही वजह है कि आईआरसीटीसी एजेंट पर्सनल यूजर आईडी से टिकट बनाते हैं। जबकि नियंता पर्सनल यूजर आईडी से पैसेंजर सिर्फ अपने रक्त संबंधियों के ही टिकट बना सकता है।