पहले विद्युतीकरण का इंतजार और अब रेक की कमी। कारण जो भी हो भुगत तो दैनिक यात्री ही रहे हैं। राजधानी से हरदोई तक का सफर करने वाले दैनिक यात्रियों को चार गुना अधिक किराया खर्च करना पड़ रहा है।
लखनऊ-हरदोई रेलखंड पर विद्युतीकरण के बावजूद घोषित मेमू सेवा शुरू न हो सकी। इसके चलते यात्रियों को सड़क मार्ग से लखनऊ से हरदोई की 110 किलोमीटर की दूरी तय करने में साधारण बस सेवा से 94 रुपये खर्च करना पड़ रहा है।
जबकि रेल मार्ग से लखनऊ से हरदोई तक 102 किलोमीटर का सफर मेमू ट्रेन से 20 रुपये में पूरा किया जा सकेगा। तीन साल पहले जब लखनऊ से हरदोई के बीच रेल विद्युतीकरण शुरू हुआ तो यह उम्मीद थी कि इस रेलखंड पर आम यात्रियों को सहूलियत मिल सकेगी।
उनको रोज की तरह अधिक किराया देकर बसों में धक्का खाते हुए नहीं जाना पड़ेगा। विद्युतीकरण पूरा हुआ और एक साल पहले रेल संरक्षा आयुक्त ने इस रेलखंड पर मेमू चलाने की अनुमति भी दे दी।
लेकिन अब तक इस रेलखंड पर मेमू के संचालन का इंतजार है। सूत्रों के मुताबिक रेलवे के पास मेमू ट्रेनों का नया रेक बचा ही नहीं है।
कपूरथला रेल कोच फैक्ट्री से निकले रेक दिल्ली और मुंबई की लोकल ट्रेन सेवाओं में इस्तेमाल हो रहे हैं। अब रेलवे दिल्ली में चल रहे पुराने रेक को लखनऊ मंगवाकर यहां से उसे हरदोई के बीच चलाने की तैयारी कर रहा है।
लखनऊ से हरदोई के लिए दैनिक यात्रियों की संख्या भी सात से आठ हजार है। करीब 1500 एमएसटी रेलवे ने ही दैनिक यात्रियों को जारी की हैं।
अभी लखनऊ से हरदोई के लिए सुबह प्रयाग-बरेली एक्सप्रेस और वाराणसी बरेली एक्सप्रेस ही हैं। सुबह सात बजे के बाद इस रेलखंड पर दूसरी कोई पैसेंजर ट्रेन नहीं चलती।