केजीएमयू में रैगिंग की शिकायत हर साल होती रही है। पिछले साल रैगिंग करते हुए केजीएमयू के छात्रों का वीडियो वायरल हुआ था। ये सड़क पर चलते हुए सलामी कर रहे थे। इस मामले में छह छात्रों को निलंबित किया गया था।
वहीं, नए छात्रों की सुरक्षा में लगे कर्मचारियों को हटाकर जुर्माना भी लगाया गया था। हालांकि, जांच के बाद आर्थिक दंड लगाकर मामले को खत्म कर दिया गया था। इस साल भी सत्र शुरू होते ही रैगिंग की शिकायत मिली।
मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की गई, लेकिन जांच में शिकायतकर्ता मुकर गए। इस पर चीफ प्रॉक्टर ने सुबह-शाम दोनों वक्त हॉस्टल की जांच का आदेश जारी कर दिया। रैगिंग करने वाले छात्रों को बाहर निकालने की धमकी दी गई। लगातार की गई सख्ती की वजह से अभी तक रैगिंग नहीं हो पाई है।
लोहिया संस्थान में पिछले साल भी रैगिंग का मामला सामने आया था। कुछ छात्रों ने एंटी रैगिंग की केंद्रीय सेल पर मेल से शिकायत की थी। इस पर तत्कालीन निदेशक ने चार छात्रों को निलंबित कर दिया था। हालांकि, माफी मांगने पर इन्हें बहाल कर दिया गया था।
पिछले दिनों कर्मचारियों एवं छात्रों के बीच हुई मारपीट के दौरान भी रैगिंग की बात सामने आई थी। प्रथम वर्ष के छात्रों ने आरोप लगाया था कि हॉस्टल से एकेडमिक ब्लॉक जाते वक्त कर्मचारी भी टिप्पणी करते हैं। वे रैगिंग जैसा ही व्यवहार करते हैं।
छोटे बाल रखना अनुशासन
लोहिया संस्थान के प्रवक्ता डॉ. विक्रम का कहना है कि रैगिंग की कोई शिकायत नहीं मिली है। छात्रों का छोटे बाल रखना एक अनुशासन के रूप में देखा जाता है।