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लखनऊ पॉलीटेक्निक: यहां भी है रैगिंग का खौफ

Wed, 11 Sep 2013 12:15 PM IST
टीम डिजिटल/लखनऊ
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सीन-1 : कानपुर रोड का लखनऊ पॉलीटेक्निक। दोपहर करीब डेढ़ बजे। जूनियर्स का एक ग्रुप प्रिंसिपल रूम के बाहर किसी का इंतजार कर रहा था। एक अनजाना सा खौफ उनके चेहरों पर साफ नजर आ रहा था।
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पूछा तो पता चला सीनियर रैगिंग करते हैं। रास्ते में रोक कर थप्पड़ मारते हैं। बेल्ट से पीटते हैं और गालियां देते हैं। वे मुंह पर रुमाल बांधे रहते हैं इसलिए उन्हें पहचान नहीं पाते। बताइए हम लोग क्या करें। प्रिंसिपल सर का इंतजार कर रहे हैं। वे थोड़ी दूर तक छोड़ने देंगे, तो कोई परेशान नहीं करेगा।

सीन-2 : लखनऊ पॉलीटेक्निक का हॉस्टल। दोपहर करीब दो बजे। हमें सीनियर समझकर सभी छात्र कमरों में चले गए। एक कमरे में घुसे तो वहां मौजूद दो जूनियर खड़े हो गए। गुड आफ्टरनून कहकर बैठाया। पूछा तो छात्रों का दर्द छलक गया।
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कहा, हम लोग कॉलेज कैंपस के बाहर निकलते हैं तो सीनियर्स पकड़ कर गली में घसीट ले जाते हैं। कहते हैं बेल्ट नहीं लगाना। शर्ट की जेब में पेन नहीं लगाना। सिगरेट पियो, जीरो कट बाल रखो। करीब एक सप्ताह पहले एक जूनियर को पकड़ लिया था। वह इतना घबरा गया कि दो दिन तक कमरे से बाहर नहीं निकला।

कॉलेज प्रशासन ने इस संबंध में कृष्णानगर थाने में लिखित शिकायत तक की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह स्थितियां तब है जब कॉलेज प्रशासन की ओर से इस महीने रैगिंग के आरोप में सात सीनियर छात्रों का अगली कक्षा में एडिमशन रोक दिया गया।

कानपुर रोड स्थित लखनऊ पॉलीटेक्निक संस्थान में वर्तमान सत्र में 480 छात्रों ने दाखिला लिया है। यहां दो पालियों में कक्षाओं का संचालन हो रहा है। कॉलेज के छात्रावास में करीब 90 छात्र रहते हैं। बाकी छात्र या तो राजधानी के रहने वाले हैं या आसपास किराए पर कमरा लेकर रहते हैं।

बेल्ट से करते हैं पिटाई
प्रथम वर्ष के कुछ छात्रों ने अपना दर्द बयां किया। छात्रों ने बताया कि किराए पर कमरा लेकर रहते हैं। छुट्टी के बाद जब घर जाते हैं तो सीनियर्स पकड़ कर गली में घसीट ले जाते हैं। अगर बेल्ट पहन रखी हो तो उसी से पिटाई शुरू कर देते हैं। छात्रों के मुताबिक पिटाई के डर से कुछ जूनियर छात्रों ने तो कॉलेज ही जाना बंद कर दिया है।

छात्रावास में रहने वाले छात्रों के चेहरे पर भी सीनियर छात्रों का डर साफ नजर आता है। एक छात्र ने बताया कि अंदर तो सीनियर कम आ पाते हैं लेकिन अगर बाहर निकले तो बचना मुश्किल है। बाल अगर थोड़ा भी बड़े हों या बेल्ट पहनी हो तो पीटना शुरू कर देते हैं। कहते हैं सीनियर का कहना नहीं माना तो मुश्किल में पड़ जाओगे। वहीं थाने में शिकायत के बावजूद कोई सुनवाई नहीं होती।

नहीं होती है सुनवाई
जूनियर छात्रों के मुताबिक दो दिन पहले कुछ सीनियर छात्रों ने एक जूनियर को खूब पीटा। छात्राें ने इसकी लिखित शिकायत थाने में की लेकिन सिपाही ने लौटा दिया। हालांकि बाद में उनकी शिकायत रख ली गई लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। कॉलेज प्रशासन ने संस्थान के आसपास के चार इलाकों को चिन्हित किया है।

कॉलेज के प्रिंसिपल राजेन्द्र सिंह ने बताया कि संस्थान में हॉस्टल उपलब्ध न होने के कारण कई छात्र आसपास के इलाकों में किराए पर कमरे लेकर रहते हैं। इनमें कई प्रथम वर्ष के छात्र भी हैं।

वर्तमान में बाला जी कॉम्पलेक्स, सैसोवीर मंदिर के पास, हिंदनगर और विजय नगर में प्रथम वर्ष के छात्रों को पीटने और रैगिंग की घटनाएं सामने आई हैं। इस संबंध में कृष्णानगर थानाध्यक्ष को लिखित शिकायत भेजी गई है।

सात छात्रों को किया सस्पेंड
संस्थान में अब तक आए रैगिंग के मामलों में सात छात्रों को सस्पेंड किया जा चुका है। इसमें सिविल के छात्र शशि कुमार, हेमंत कुमार राव व धीरज और इलेक्ट्रिकल के सचिन शुक्ला, इंद्रजीत कुमार, योगेन्द्र कुमार और रवि कांत शामिल हैं।

प्रिंसिपल राजेन्द्र सिंह ने बताया कि इन सभी छात्रों को आगे प्रवेश नहीं दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि रैगिंग पर नियंत्रण के लिए एंटी रैगिंग समिति सक्रिय है। प्रत्येक छात्रों को इस समिति के सदस्यों के साथ अन्य शिक्षकों के भी नंबर उपलब्ध कराए गए हैं। कोई भी रैगिंग की शिकायत उनसे कर सकता है।
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