डिप्टी सीएम को गेट पर ही एक महिला चैनल के सहारे बैठी मिली। पूछा-कैसे बैठी हो बिटिया, दवाई मिल गई, बाहर से तो दवा नहीं मिली। आगे बढ़े तो एक बुजुर्ग ने डिप्टी सीएम को बताया कि डॉक्टर देखिन, दवा दिहिन, जांच बाहर से लिखिन हैं। खांसी से ग्रसित बुजुर्ग की बात को सुनकर डिप्टी सीएम ने अधीक्षक की क्लास ली। बोले-जब अस्पताल में जांचें उपलब्ध हैं तो बाजार से क्यों कराई जा रही हैं। तुरंत बाबा की जांच कराओ। पीने के पानी की व्यवस्था को चेक करने के लिए टोटी चलाकर पानी की गुणवत्ता की जांच की। गेट पर स्ट्रेचर मिलने पर वार्ड ब्वाय को ठीक से स्ट्रेचर रखने के निर्देश दिए।
दो सौ मीटर पहले रोक दिया काफिला, अकेले लिया स्वास्थ्य सेवाओं का जायजा
सीएचसी से करीब 200 मीटर दूर पहले महराजगंज रोड पर सैय्यद बाबा मोड़ के निकट अपना लाव लश्कर छोड़कर डिप्टी सीएम पैदल ही सीएचसी पहुंचे। नई बील्डिंग में पहुंचे, लेकिन पुरानी बील्डिंग में परचा बनने की जानकारी मिलने पर वे लाइन में कड़ी धूप में करीब पांच मिनट खड़े होकर अपने नाम का पर्चा बनवाया। पर्चा बनवाने के बाद अस्पताल का भ्रमण किया।
डॉक्टर साहब बैठ जाओ, करतूत मत छुपाओ..
डिप्टी सीएम का परचा काउंटर पर पर्चा बनवाने का नंबर आया तो कर्मचारी मोबाइल पर बात करने लगा। अधीक्षक कक्ष में घुसे तो अधीक्षक उपस्थिति रजिस्टर को अपडेट करते पकड़े गए। डिप्टी सीएम बोले- डॉक्टर साहब क्या लिख रहे थे...। रजिस्टर में क्या कर रहे थे। यह गलत बात है, यह पन्ना कैसे फटा है। डॉक्टर साहब बैठ जाओ, करतूत मत छुपाओ..। स्टाफ से कहो कि काम के समय मोबाइल से बात नहीं किया करें।
अधीक्षक ने हाथ जोड़ा तो डिप्टी सीएम ने नसीहत दी
डिप्टी सीएम निरीक्षण के बाद वापस जाने के लिए सीएचसी के गेट पर पहुंचे तो खामियों से घबराए अधीक्षक डॉ. एके जैसल ने हाथ जोड़े। इस पर डिप्टी सीएम ने अधीक्षक का हाथ पकड़कर उनका हौसला बढ़ाया। डिप्टी सीएम बोले-हम सबको मिलकर काम करना है। सरकार से मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं का पूरा लाभ मरीजों को दिलाएं। पानी की व्यवस्था ठीक रखें। मरीजों को अस्पताल से दवा व जांच की व्यवस्था कराएं। परिसर में सफाई जरूर रखी जाए। मरीज भगवान हैं। इन्हीं की वजह से हम आप यहां हैं। नसीहत देने के बाद डिप्टी सीएम चले गए।