फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

देवराज के बाद यूपी पुलिस पर होगा किसका राज?

Thu, 26 Dec 2013 04:24 PM IST
विष्णु मोहन/अमर उजाला, लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रदेश पुलिस के मुखिया की कुर्सी बमुश्किल पांच दिन बाद खाली हो रही है। इसके साथी ही इस पद की दावेदारी के लिए दौड़ तेज हो गई है।
विज्ञापन


महकमे के सर्वोच्च पद पर तैनात होने के लिए ज्यादातर अर्ह अधिकारी अपनी-अपनी जुगत में लग गए हैं।

अब रेस में पांच नाम
कुछ समय पहले तक डीजीपी पद के लिए बमुश्किल तीन ही अधिकारियों क नाम पर चर्चा चल रही थी। अब इसमें दो नामों का इजाफा हो गया है। मौजूदा समय में डीजीपी पद के दावेदार अधिकारियों में रिजवान अहमद, अरुण कुमार गुप्ता, एएल बनर्जी, रंजन द्विवेदी और सुव्रत त्रिपाठी के नाम शामिल हैं।

इनमें से एक अधिकारी पिछले दिनों मुख्यमंत्री आवास के बाहर दिखाई पड़े।

जो अधिकारी दौड़ में हैं, उनमें सबका ग्राफ अलग है। पिछले दिनों सुव्रत त्रिपाठी से नाराजगी की वजह से पहले उनसे ईओडब्ल्यू का अतिरिक्त प्रभार लिया गया और फिर उन्हें पुलिस को-आपरेटिव सेल से हटा कर रूल्स एंड मैनुअल जैसे महत्वहीन विभाग में भेज दिया गया।
विज्ञापन


सरकार की इस नाराजगी के बाद से यह माना जा रहा है कि डीजी पद के लिए सुव्रत त्रिपाठी के नाम पर शायद ही विचार हो।

सबसे अधिक पहुंच रिजवान अहमद की
दौड़ में शामिल लोगों में से सबसे अधिक पहुंच रखने वाले डीजी रेलवे रिजवान अहमद हैं। रिजवान अहमद अपने कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण पदों पर तैनात रह चुके हैं। गोरखपुर और कानपुर का आईजी रहने के साथ ही डीआईज़ी गोरखपुर और कई जिलों के कप्तान भी रहे।

हालांकि, उनकी सेवा निवृत्ति में अधिक समय नहीं है और वह फरवरी में रिटायर होने वाले हैं। लेकिन उनकी दावेदारी बनी हुई है।

एएल बनर्जी और रंजन द्विवेदी की यूपी में अधिक समय तक फील्ड पोस्टिंग नहीं रही है। इसे उनके पक्ष में कमजोर कड़ी माना जा रहा है। ऐसे में रिजवान अहमद के नाम के बाद जिस नाम की सबसे अधिक चर्चा चल रही है वह अरुण गुप्ता का है।

अब समीकरण कुछ बदले
हालांकि, अरुण गुप्ता के नाम पर सरकार पहले विचार नहीं कर रही थी, पर अब समीकरण कुछ बदले हुए हैं। फील्ड पोस्टिंग के अलावा भी कैरियर में अच्छा स्थान रखने वाले गुप्ता का नाम अब सरकार द्वारा विचाराधीन नामों में से एक बताया जा रहा है।

सरकार भी मान रही है कि लोकसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद चुनाव आयोग नया डीजी लाने के लिए कहेगा। ऐसे में अगर सरकार किसी और को डीजी बना देती है तो आयोग उसे हटा देगा।

रिजवान अहमद को अगर अभी तैनात नहीं किया जाता है तो फरवरी के बाद उनकी दावेदारी नहीं रहती है।

...अधिकारी सरकार की उतनी नहीं सुनेगा
अगर रिजवान की जगह किसी दूसरे को डीजी बनाया जाता है और आयोग उसे हटा कर दूसरे की तैनात कर देता है तो जिस अधिकारी की आयोग तैनाती करेगा, वह अधिकारी सरकार की उतनी नहीं सुनेगा, जितनी की चुनाव के समय सरकार को उससे अपेक्षा होगी।
विज्ञापन


सूत्रों के मुताबिक यह माना जा रहा है कि आयोग एके गुप्ता का इस पद के लिए चयन कर सकता है। ऐसे में सरकार यह भी विचार कर रही है कि क्यों न वह एक गुप्ता को खुद ही इस पद पर तैनात कर दे, जिससे सरकार का डीजी पर दबाव बना रहे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें