सीवर लाइन का काम घटिया तरीके से कराए जाने का लग रहा है आरोप।
लखनऊ। स्मार्ट सिटी योजना में करीब 300 करोड़ की लागत से बिछाई जा रही सीवर लाइन का काम घटिया तरीके से किए जाने के आरोप लगे हैं। ये आरोप भाजपा, सपा और कांग्रेस के पार्षदों ने लगाए हैं। भाजपा के वरिष्ठ पार्षद और पूर्व कार्यकारिणी सदस्य का कहना है कि पाइपों की क्षमता के साथ मैनहोल चैंबर बनाने और निर्माण सामग्री भी मानक के तहत इस्तेमाल नहीं की जा रही है। उन्होंने प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री से जांच की मांग की है। पहले भी कई पार्षद इसे लेकर सवाल उठा चुुके हैं।
स्मार्ट सिटी योजना में कैसरबाग से लगे लालबाग, हजरतगंज, गोलागंज और अमीनाबाद क्षेत्र में सीवर लाइन बिछाई जा रही है। इसे लेकर भाजपा पार्षद नागेंद्र सिंह चौहान का आरोप है कि जिस क्षमता की पाइप लाइन बिछाई जा रही है, वह तो पांच साल भी नहीं चलेगी, जबकि बताया जा रहा है कि ये लाइन 30 साल के लिए है। पार्षद का आरोप है कि सीवर लाइन के लिए न तो सही से गिट्टी बिछा रहे हैं और न ही चैंबर बनाया जा रहा है। प्लास्टर की गुणवत्ता भी ठीक नहीं है। ऐसे में लीकेज की समस्या होगी। इसकी जांच होनी चाहिए। कांग्रेस के वरिष्ठ पार्षद गिरीश मिश्र, सपा पार्षद दल नेता यावर हुसैन रेशू, राजकुमार सिंह राजा, शफीकुर्रहमान चचा का कहना है कि सीवर लाइन के प्रोजेक्ट पर सिर्फ बजट खर्च किया जा रहा है। पाइप लाइन की क्षमता और बढ़ाई जाए, तभी इसका पूरा फायदा मिल पाएगा। इस पर जल निगम के प्रोजेक्ट मैनेजर पीयूष मौर्या का कहना है कि आईआईटी बीएचयू की ओर से प्रोजेक्ट जांचने के बाद ही काम शुरू हुआ है। सीवर लाइन कम क्षमता की नहीं है। 30 साल की जरूरत के हिसाब से 200 एमएम से लेकर 1400 एमएम तक के पाइप डाले गए हैं। कुछ लोग चाहते हैं कि सीवर लाइन से ही घरों और बरसात का पानी भी निकल जाए, जबकि सीवर लाइन में बरसाती पानी नहीं जा सकता।