लखनऊ। 130 करोड़ रुपये खर्च कर बन रहे चौक फ्लाईओवर का काम पुरातत्व एनओसी की वजह से दो माह से बंद पड़ा है। चौक से शुरू होकर हैदरगंज तिराहे तक इस दो लेन के फ्लाईओवर के लिए हुसैनाबाद क्षेत्र की ओर एप्रोच रोड बनाने का काम एएसआई ने रुकवा दिया है। सेतु निगम और एएसआई के बीच पुरातत्व एनओसी को लेकर शुरू हुआ विवाद पुलिस तक भी पहुंच चुका है।
सेतु निगम के अधिकारियों का कहना है कि दूसरी तरफ से फ्लाईओवर बनकर तैयार है। वहीं, एक साल पहले आवेदन के बावजूद अभी तक पुरातत्व एनओसी नहीं मिली है। इसके उलट एएसआई अधिकारी लगातार आपत्ति किए हैं। खुद उनके विभाग के केंद्रीय मंत्री इसके लिए दिल्ली से आकर सहमति बना चुके हैं। इसके बाद सेतु निगम के परियोजना प्रबंधक के खिलाफ एएसआई ने एफआईआर करा दी। इतना ही नहीं सेतु निगम ने जो निर्माण करा लिया है, उसे तोड़ने तक की धमकी एएसआई के अधिकारी दे चुके हैं।
एएसआई के अफसरों का कहना है कि सेतु निगम ने बिना एनओसी लिए काम शुरू करा दिया। इमामबाड़ा और आसिफी मस्जिद के नजदीक किसी भी तरह का निर्माण प्रतिबंधित है। ऐसा हुसैनाबाद के संरक्षित क्षेत्र में होने से है। सेतु निगम मौके पर खनन और निर्माण शुरू कर चुका था, जिसे रुकवाने को एफआईआर कराई गई। सेतु निगम बिना पुरातत्व एनओसी लिए काम नहीं करा सकता है।
मनमानी करने में अड़े अधिकारी
शहर की जनता का हित देखने की जगह अधिकारी एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। सेतु निगम ने एएसआई के अधिकारियों पर जनहित के इस प्रोजेक्ट में सहयोग नहीं करने और दूसरे अवैध निर्माण बिना रोक-टोक पूरे हो जाने का आरोप लगाया है। इसके बाद से एएसआई के अफसर किसी न किसी तरह पुरातत्व एनओसी में अड़ंगा लगाए हैं।
रक्षामंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट का यह हाल
समय पर एनओसी मिल जाती तो चौक फ्लाईओवर छह महीने पहले पूरा हो सकता था। फिलहाल दो महीने से काम बंद है। अभी एनओसी मिलने पर भी तीन महीने का समय सेतु निगम को प्रोजेक्ट पूरा करने में लगेगा। यह हाल तब है जब यह रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का ड्रीम प्रोजेक्ट है। सांसद प्रतिनिधि दिवाकर त्रिपाठी का कहना है कि जल्द एनओसी मिले, इसका प्रयास किया जा रहा है।
25 को निरीक्षण करेगी समिति
पुरातत्व एनओसी का विवाद दिल्ली तक पहुंचने के बाद मंडलायुक्त रंजन कुमार ने समिति बना दी है। यह निर्माणाधीन साइट का 25 फरवरी को निरीक्षण कर पुरातत्व एनओसी के लिए मंडलायुक्त को रिपोर्ट देगी। इसके आधार पर ही एनओसी देने का फै सला लिया जाएगा। पुरातत्व एनओसी एएसआई ही जारी करेगा।