राज्य सरकार ने विभिन्न जिलों में यूरिया व डीएपी का अधिक मूल्य लिए जाने की शिकायतों को गंभीरता से लिया है। कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने सभी उर्वरक विक्रताओं की दुकानों के बाहर उर्वरकों के मूल्य लिखने के निर्देश दिए हैं। जिससे किसानों को उर्वरक के सही मूल्य की जानकारी मिल सकेगी।
शाही बृहस्पतिवार को विधान भवन स्थित कार्यालय कक्ष में उर्वरक निर्माता कंपनियों और विभाग के अधिकारियों के साथ उर्वरक की आपूर्ति एवं उपलब्धता की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने बताया कि प्रदेश में उर्वरक की कहीं कोई कमी नहीं है। दिसंबर 2020 तक यूरिया की आवश्यक मात्रा 23 लाख मीट्रिक टन के सापेक्ष 12.60 लाख मीट्रिक टन यूरिया उपलब्ध है। इसी के साथ 16 लाख मीट्रिक टन के सापेक्ष 14.15 लाख मीट्रिक टन डीएपी उपलब्ध है।
कृषि मंत्री ने उर्वरक निर्माता कंपनियों से प्राइमरी पाठशाला में एलईडी, इन्वर्टर, कंप्यूटर, बेंच, कुर्सी, लाईट व पंखा लगाने तथा पेंटिंग कार्य की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने यह कार्य 30 नवंबर तक पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने पीओएस और बायोमीट्रिक मशीनों की उपलब्धता की भी समीक्षा की। उन्होंने जिला कृषि अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जिला स्तर पर उर्वरक व्यापारियों को पीओएस मशीनों के संचालन के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाएं। बैठक में अपर मुख्य सचिव कृषि डॉ. देवेश चतुर्वेदी, कृषि निदेशक एपी श्रीवास्तव और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।