प्रांतीय चिकित्सा सेवा संघ (पीएमएस) 20 सितंबर को काला फीता बांधकर विरोध दिवस मनाएगा।
डीएसीपी (डायनमिक एश्योर्ड कॅरिअर प्रोग्रेशन) सहित अपनी लंबित मांगे न पूरे किए जाने से नाराज संघ के पदाधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह घोषणा की।
प्रेसवार्ता में पदाधिकारियों ने कहा कि शासन ने लगातार उनकी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया, लेकिन उसका कोई परिणाम नहीं आया।
इसके विरोध में एक दिवसीय विरोध दिवस, उसके बाद विरोध सप्ताह का आयोजन किया जाएगा। 8 अक्टूबर को केंद्रीयकारिणी की बैठक कर आगे के आंदोलन की नीति तय की जाएगी।
संघ के अध्यक्ष डॉ. अशोक यादव और महामंत्री डॉ. सचिन वैश्य ने बताया कि प्रदेश में सभी कर्मचारियों को 1 दिसंबर, 2008 से एश्योर्ड कॅरिअर प्रोग्रेशन (एसीपी) का लाभ दिया जा रहा है।
चिकित्सकों के विषम एवं विशेष परिस्थितियों में कार्य करने के कारण सरकार ने उनके संरक्षण के लिए अतिरिक्त लाभ देने के लिए रिजवी कमेटी का गठन किया था।
कमेटी ने चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संवर्ग के डीएसीपी लागू करने की संस्तुति की थी जिसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। इससे संवर्ग के चिकित्सकों को आर्थिक नुकसान हो रहा है।
महानिदेशालय में निदेशक के 12 पद रिक्त हैं। अपर निदेशक के आधे से अधिक पद रिक्त हैं। सीएमओ व सीएमएस के पदों पर कार्यवाहक बैठे हुए हैं।
हालत ये हैं कि लेवल वन के लगभग 3000 चिकित्सकों की वरिष्ठता सूची का निर्धारण तीन साल से लंबित है।
एनआरएचएम के सहयोग से चल रही योजनाओं में तैनात संविदा कर्मचारी व चिकित्सकों के नवीनीकरण में लापरवाही बरती जाती है। प्रेसवार्ता में संघ के उपाध्यक्ष महिला डॉ. निरुपमा सिंह, डॉ. अमित सिंह मौजूद थे।