लखनऊ। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय (बीबीएयू) में छात्रावास की टाइमिंग बढ़ाने, मेस में टोकन सिस्टम लागू करने समेत अन्य मांगों पर कार्रवाई न होने से नाराज छात्राओं का आक्रोश मंगलवार को फूट पड़ा। प्रशासन की ओर से सकारात्मक कार्रवाई न मिलने से नाराज छात्राओं ने अंबेडकर भवन पर न सिर्फ प्रदर्शन किया बल्कि शाम को गेट पर ताला भी जड़ दिया।
छात्राओं का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर पहले भी डीएसडब्ल्यू से मिल चुकी हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। आज वे फिर उनसे मिलने पहुंचीं और काफी देर इंतजार के बाद भी वह उपलब्ध नहीं हुए। इससे नाराज छात्राएं अंबेडकर भवन में धरने पर बैठ गईं। छात्राएं गर्ल्स हॉस्टल में वापसी का समय रात 8 बजे से बढ़ाकर 10 बजे करने, हॉस्टल मेस का एकमुश्त शुल्क लेने की जगह टोकन सिस्टम (जितनी डाइट खाना, उतने का शुल्क) लागू करने, चित्रलेखा की मेट्रन के अभद्रता करने पर कार्रवाई समेत कई मांगें कर रही थीं। यहां भी जब सुनवाई नहीं हुई तो वे नाराज होकर बाहर निकलीं और अंबेडकर भवन के गेट पर ताला लगाकर वहीं धरने पर बैठ गईं। छात्राओं का कहना है कि हॉस्टल में वापसी का समय रात आठ बजे होने की वजह से वह सेंट्रल लाइब्रेरी का उपयोग नहीं कर पाती हैं। जबकि यह सारी सुविधा छात्रों के लिए लागू है। छात्राओं की बात न सुने जाने की सूचना पर एनएसयूआई के बैनर तले अन्य छात्र भी पहुंच गए।
प्रदर्शन की सूचना पर रजिस्ट्रार अश्विनी कुमार सिंह, डीएसडब्ल्यू प्रो. बीएस भदौरिया, प्रॉक्टर प्रो. बीबी मलिक मौके पर पहुंचे। अधिकारियों की छात्राओं से काफी देर तक बहस हुई। अंतत: विश्वविद्यालय प्रशासन ने मेट्रन को हटाकर दो दिन में जांच कराने व उनकी अन्य मांगों पर दो दिन का कार्रवाई के लिए समय मांगा। छात्राओं ने कहा कि यदि दो दिन के अंदर उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे दोबारा आंदोलन के लिए बाध्य होंगी। रजिस्ट्रार अश्विनी कुमार सिंह ने कहा कि छात्राओं की उचित मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई की जाएगी।