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किसानों के बहाने सरकार को घेरा विपक्षियों ने

Tue, 18 Nov 2014 10:16 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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गन्ना मूल्य न बढ़ाने और किसानों को बकाया भुगतान न दिलाने का मुद्दा सोमवार को विधानसभा में जोरदार ढंग से उठा।
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समूचे विपक्ष ने सरकार की घेराबंदी करते हुए गन्ने और धान के मुद्दे पर उसे किसान विरोधी साबित करने की कोशिश की।

उन्होंने 350 रुपये क्विंटल गन्ना मूल्य घोषित करने की मांग की। सरकार के जवाब से असंतुष्ट होकर भाजपा व बसपा के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया।

भाजपा विधायक दल के नेता सुरेश खन्ना और सुरेश राणा की ओर से गन्ना किसानों की समस्याओं पर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश करते हुए इस मुद्दे पर सदन में चर्चा कराने की मांग की गई।

खन्ना ने कहा, गन्ना शोध परिषद सरकारी संस्था है। उसने गन्ना की लागत 254 रुपये प्रति क्विंटल आंकी है। पिछले साल यह 251.30 रुपये प्रति क्विंटल थी।

गन्ना लागत में इस बार 2.70 रुपये क्विंटल की वृद्धि बताई गई है। सपा सरकार ने अपने घोषणापत्र में वादा किया था कि गन्ना लागत में 50 प्रतिशत राशि जोड़कर फसलों का न्यूनतम मूल्य तय किया जाएगा।
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सपा सरकार भूली अपने वादे

अब सपा इस वादे को भूल चुकी है। गन्ना मूल्य न्यूनतम 350 रुपये क्विंटल होना चाहिए। उन्होंने कहा, किसानों से धान की खरीद भी नहीं की जा रही है।

25 लाख मीट्रिक टन के लक्ष्य के विपरीत केवल 60 हजार मीट्रिक टन धान खरीद हुई है। सरकारी रेट 1359 रुपये प्रति क्विंटल है लेकिन किसान 800 से 1000 रुपये क्विंटल में धान बेचने को मजबूर हैं।

नेता प्रतिपक्ष स्वामी प्रसाद मौर्य ने कहा कि पूरे प्रदेश में गन्ना किसान आंदोलित हैं। खुद को किसानों का हमदर्द बताने वाली सरकार को किसानों का दर्द समझना चाहिए।

उन्होंने कहा, पेराई सत्र 2012-13 में गन्ना मूल्य 280 रुपये घोषित किया गया था। 2013-14 में भी यही रेट रहा और 2014-15 में भी मूल्य नहीं बढ़ाया गया।

मिलों पर किसानों का लगभग दो हजार करोड़ रुपये बकाया है। किसानों की उपेक्षा के कारण ही गन्ना क्षेत्रफल में गिरावट आ रही है।

कांग्रेस ने कहा मर जाएंगे किसान

कांग्रेस के पंकज मलिक ने कहा कि गन्ना किसान संकट के दौर से गुजर रहे हैं। वे मरने के कगार पर हैं। दुर्भाग्यपूर्ण है कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद उन्हें गन्ना मूल्य भुगतान नहीं कराया जा रहा है।

सांप्रदायिक दंगों की चपेट में आए वेस्ट यूपी में हालत बहुत गंभीर है। सहारनपुर मंडल में 365 और मेरठ मंडल में 735 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया है।

तितावी चीनी मिल पर हजारों किसान 18 दिन से धरना दे रहे हैं। इस मिल पर किसानों का 159 करोड़ रुपये बकाया है। भुगतान के लिए ठोस कदम उठाए जाएं अन्यथा मिल मालिकों को जेल भेजा जाए।

कांग्रेस सदस्यों ने पडरौना मिल की नीलामी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना था कि यह मिल केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के अधीन है। लोकसभा चुनाव के दौरान मोदी ने इस मिल को सौ दिन में चलाने का वादा किया था।

विधानसभा में सोमवार को बसपा सदस्यों ने सरकार विरोधी नारे लिखे बैनरों के साथ सरकार की घेराबंदी की।

धान खरीद न होने के लिए केंद्र दोषी

बसपा के जीएन सिंह ने कहा कि धान खरीद न होने के लिए केंद्र सरकार दोषी है। केंद्र ने चावल का जो मानक तैयार किया है, उसके चलते पांच दिन बाद धान खरीद पूरी तरह बंद हो जाएगी।

हरियाणा और पंजाब में आठ फीसदी डैमेज वाला चावल खरीदा जा रहा है जबकि यूपी में यह सीमा साढ़े चार प्रतिशत रखी गई है।

संसदीय कार्यमंत्री आजम खां ने कहा कि सपा सरकार किसानों की हितैषी है। गन्ना मूल्य निर्धारण भी इसी को ध्यान में रखकर किया गया है कि किसानों को नुकसान न हो। उन्हें गन्ने की कीमत मिले।

किसानों को बकाया दिलाने के लिए सरकार सचेत है। आजम के इस संक्षिप्त जवाब को भाजपा और बसपा सदस्यों ने नाकाफी बताया। उन्होंने सरकार पर गन्ना किसानों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए सदन से बहिर्गमन कर दिया।

मोदी को वादा याद दिलाएगी सरकार

संसदीय कार्यमंत्री आजम ने कहा कि पडरौना चीनी मिल की नीलामी रोकने और उसे चलाने का वादा याद दिलाने के लिए प्रदेश सरकार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखेगी।

पडरौना मिल की नीलामी 29 नवंबर को होनी है। कांग्रेस के अजय कुमार लल्लू ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान पडरौना मिल की नीलामी का मुद्दा उठाया। कहा, यह मिल केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय के अधीन आती है।

मोदी जब चुनावी सभा करने आए थे तो इसे सौ दिन में चलाने का वादा किया था।

विधान परिषद में नहीं हो पाया प्रश्न प्रहर

विधान परिषद में सोमवार को विपक्ष के हंगामे के चलते प्रश्न प्रहर नहीं हो सका।

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर प्रदेश सरकार को पूरी तरह फेल बताते हुए लगभग संपूर्ण विपक्ष सभापति के आसन के सामने वेल में आ गया।

शिक्षक दल ने आरोप लगाया कि तदर्थ शिक्षकों के नियमितीकरण पर सरकार लगातार वादा खिलाफी कर रही है तो बसपा, भाजपा, कांग्रेस व रालोद सदस्यों ने कानून-व्यवस्था पर बुरी तरह फेल होने के साथ ही सरकार पर किसानों के साथ वादा खिलाफी का आरोप लगाया।
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तीन बार स्‍थगित हुई कार्यवाही

हंगामे के कारण सभापति गणेश शंकर पांडेय को सदन की कार्यवाही तीन बार स्थगित करनी पड़ी।

तीसरी बार कार्यवाही स्थगित करने से पहले उन्होंने एजेंडे का औपचारिक कामकाज निपटवाया और अनुपूरक अनुदान मांगों को प्रस्तुत कराया।

साथ ही नारेबाजी व हंगामा के बीच कार्यवाही मंगलवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दी। इस बीच कुल डेढ़ घंटा में सदन की कार्यवाही बमुश्किल लगभग नौ मिनट ही चल पाई।

सब कुछ वैसा ही हुआ जैसी आशंका थी। सदन के बैठते ही बसपा के सदस्य सरकार विरोधी नारे लिखी नीली टोपियां लगाकर हंगामा करते हुए वेल में आ गए।
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