नई पेंशन नीति के विरोध में कर्मचारी लामबंद होने लगे हैं।
कर्मचारियों के कई संगठनों ने शुक्रवार को विरोध-प्रदर्शन कर अपनी नाराजगी व्यक्त की। राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के आह्वान पर विभिन्न कर्मचारी संगठनों ने सुबह कई शहरों में कार्य बहिष्कार किया।
लखनऊ, बाराबंकी, बलिया, गाजीपुर, झांसी, कानपुर, महराजगंज, बरेली, बदायूं, पीलीभीत, कासगंज, अलीगढ़, आगरा, मेरठ, मुरादाबाद, हाथरस, फीरोजाबाद, फैजाबाद, गोरखपुर, वाराणसी, इलाहाबाद सहित विभिन्न जनपदों में कर्मचारियों ने अपने-अपने कार्यालयों में कार्य बहिष्कार कर सभा की।
राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष हरि किशोर तिवारी ने कहा कि सभी जगह कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन नीति बहाल करने की मांग की है। महामंत्री शिवबरन सिंह यादव ने कहा कि नई पेंशन नीति छलावा है।
लखनऊ में वाणिज्य कर, योजना भवन, समाज कल्याण, शिक्षा भवन, उद्यान भवन, कृषि विपणन, रिमोट सेंसिंग, स्पोर्ट्स कॉलेज, खेल निदेशालय, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग सहित कई विभागों में कार्य बहिष्कार कर नीति का विरोध किया गया। कर्मचारी नेताओं ने कहा कि अगर नई पेंशन नीति वापस नहीं ली गई तो कर्मचारी बड़ा आंदोलन छेड़ेंगे।
उधर, सचिवालय एवं राज्य कर्मचारियों ने भी बैठक कर नई पेंशन नीति का विरोध किया। कर्मचारी नेता विजय कुमार निगम ने कहा कि नई नीति में सरकार पेंशन की रकम शेयर मार्केट में लगाएगी, जहां हमेशा पैसा डूबने का खतरा बना रहता है।
सांसदों व विधायकों को भी नई पेंशन नीति से अलग रखा गया है। इसका भी कर्मचारियों ने विरोध किया है। बैठक में सुंदरलाल भारती, मुश्ताक अली, संजय कमल, सुनीता द्विवेदी, चित्रगुप्त, अब्दुल वाहिद, मो. अख्तर सिद्दीकी, बलदाऊ श्रीवास्तव, एसपी श्रीवास्तव, रामचंद्र तिवारी आदि उपस्थित थे।