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Lucknow News: प्रोटीन्स बताएंगे गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप का खतरा होगा या नहीं

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प्रतीकात्मक।
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मनीषा गोस्वामी
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लखनऊ। गर्भावस्था के दौरान होने वाली जानलेवा समस्या प्री-एक्लेम्पसिया (गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप) की पहचान अब शुरुआती महीनों में ही संभव होगी। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग (क्वीन मेरी) के एक अध्ययन में सामने आया है कि रक्त में मौजूद खास प्रोटीन्स के जरिये यह पता लगाया जा सकता है कि महिला को भविष्य में इस बीमारी का खतरा है या नहीं।
इस महत्वपूर्ण अध्ययन को प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल एनल्स ऑफ अफ्रीकन मेडिसिन में प्रकाशित किया गया है। अध्ययन में मुख्य रूप से दो प्रोटीन्स एमएमपी-9 और एमएमपी-13 (मैट्रिक्स मेटालोप्रोटीनेज) की भूमिका की जांच की गई। विभागाध्यक्ष डॉ. अंजू अग्रवाल, प्रो. डॉ. रेनू सिंह, डॉ. मोना असनानी, डॉ. स्मृति अग्रवाल, डॉ. नीति निगम की टीम ने 18 महीनों तक 90 गर्भवती महिलाओं पर यह अध्ययन किया।
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पहली तिमाही में ही मिल जाएंगे संकेत

अध्ययन में सबसे चौंकाने वाले और राहत देने वाले परिणाम सामने आए।
समय से पहले पहचान :
आमतौर पर प्री-एक्लेम्पसिया के लक्षण गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के बाद उभरते हैं। लेकिन इस अध्ययन के अनुसार रक्त में बदलाव 11वें से 14वें सप्ताह के बीच ही दिखने लगते हैं।
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प्रोटीन का स्तर :
पीड़ित महिलाओं में एमएमपी-9 का स्तर सामान्य से काफी कम, जबकि एमएमपी-13 का स्तर बढ़ा हुआ पाया गया।
सटीक पूर्वानुमान :
सिर्फ एक ब्लड सैंपल की जांच से डॉक्टर यह जान सकेंगे कि कौन सी महिला हाई-रिस्क श्रेणी में है।
जीवन रक्षक है यह अध्ययन

स्त्री रोग विशेषज्ञों के अनुसार, प्री-एक्लेम्पसिया मातृ मृत्यु दर और समय से पहले प्रसव (प्री-मैच्योर डिलीवरी) के मुख्य कारणों में से एक है। अक्सर जब तक इसकी पहचान होती है, तब तक स्थिति गंभीर हो चुकी होती है। पहली तिमाही में जोखिम का पता चलने से समय रहते उपचार शुरू किया जा सकेगा, जिससे मां और गर्भस्थ शिशु दोनों को सुरक्षित रखा जा सकता है।
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