लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय में मंगलवार को हुई वित्त समिति की बैठक में लंबे समय से नियत वेतनमान पर काम कर रहे तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को न्यूनतम वेतन देने के प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी गई। मंगलवार को प्रकाशित अंक में ही अमर उजाला ने इस बात की संभावना जता दी थी जो बैठक के बाद सही साबित हुई।
कुलपति प्रो. जेपी सैनी की अध्यक्षता में हुई बैठक में रखे गए प्रस्ताव के मुताबिक, नियत वेतन कर्मचारियों को अभी तक 11,600 रुपये नियत वेतन मिलता है। इसे बढ़ाकर 18 हजार कर दिया गया है। इसके साथ ही जिन वेतन कर्मियों का वेतन 17 हजार था, उनका वेतन 21,400 किए जाने का प्रस्ताव पास किया गया। सेल्फ फाइनेंस में अतिथि शिक्षकों के लिए थ्योरी कक्षा के लिए प्रति कक्षा 1500 रुपये और प्रैक्टिकल कक्षा के लिए 750 रुपये प्रति घंटा पारिश्रमिक देने का प्रस्ताव रखा गया। इस तरह उन्हें करीब 50 हजार तक वेतन मिल सकता है। साथ ही विवि के विभिन्न विभागों में संविदा शिक्षक के रूप में सेवाएं दे रहे शिक्षकों के वेतन में तीन प्रतिशत बढ़ोतरी के लिए समिति के गठन को मंजूरी दी गई। बैठक में कुलसचिव डॉ. भावना मिश्रा, वित्त अधिकारी हिमानी, परीक्षा नियंत्रक विद्यानंद त्रिपाठी भी मौजूद रहे।
एकेडमिक काउंसिल की बैठक आज
वित्त समिति की बैठक के बाद एकेडमिक काउंसिल की बैठक बुधवार को आहूत की गई है जिसमें कई अहम प्रस्ताव रखे जाने की संभावना है। इस दौरान कुछ नए पाठ्यक्रमों को भी मंजूरी मिल सकती है। साथ ही एमओयू के अंतर्गत कुछ कोर्सों के तैयार सिलेबस को भी पास किया जा सकता है।