प्रमोशन की बाट जोह रहे सूबे के उपनिरीक्षकों व निरीक्षकों के लिए खुशखबरी है। राज्य सरकार ने उपनिरीक्षक और निरीक्षक (नागरिक पुलिस) सेवा नियमावली-2008 में संशोधन कर दिया है।
नई सेवा नियमावली में लिखित परीक्षा का झंझट खत्म कर दिया गया है। यानी अब सर्विस रिकॉर्ड व शारीरिक दक्षता परीक्षा के आधार पर प्रमोशन किए जाएंगे।
नई नियमावली में पुरुषों के लिए दौड़ के दायरे को कम कर दिया गया है तो महिलाओं के लिए समय बढ़ा दिया गया।
यही नहीं 19 मई 2011 को जारी विज्ञापन के तहत उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस के पद के लिए आवेदन करने वालों को भी नई नियमावली में अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।
प्रमुख सचिव अनिल कुमार गुप्ता ने गत 11 दिसंबर को नई नियमावली जारी कर दी। डीजीपी देवराज नागर ने नई नियमावली का अनुमोदन कर आगे की कार्रवाई के लिए आईजी स्थापना को भेज दिया है।
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं पदोन्नति बोर्ड के अपर सचिव अमिताभ यश ने बताया कि प्रमोशन के लिए चयन समिति गठित की जाएगी जिसकी अध्यक्षता बोर्ड के अध्यक्ष और नामित आईजी करेंगे।
समिति में डीजीपी की तरफ से एसपी स्तर का अफसर भी शामिल होगा। इसके अलावा पुलिस सेवा के पांच राजपत्रित स्तर के अफसर भी समिति में होंगे।
इन अफसरों का चयन बोर्ड के अध्यक्ष करेंगे। यह समिति अभ्यर्थियों के सर्विस रिकॉर्ड के आधार पर उनके प्रमोशन की सूची तैयार करेगी।
सीधी भर्ती में 2011 वालों को आयुसीमा में छूट
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं पदोन्नति बोर्ड की ओर से उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस के पद पर भर्ती के लिए 19 मई 2011 को जारी किए गए विज्ञापन के तहत आवेदन करने वालों को अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी।
दरअसल यह भर्ती नहीं हो सकी थी। आयु सीमा में छूट दिए जाने से उन आवेदकों को भी परीक्षा में शामिल होने का मौका मिल सकेगा।
महिलाओं के लिए दौड़ का समय बढ़ा तो पुरुषों की कम हुई दूरी
सूबे के विभिन्न जनपदों में दौड़ पूरी करने के चक्कर में कई पुलिसकर्मियों की मौत के बाद सरकार ने पिछले दिनों दौड़ के नियमों में बदलाव कर दिया था।
इसके तहत पुरुष अभ्यर्थियों को 35 मिनट में 4.8 किलोमीटर दौड़ना था। इसे भी घटाकर अब 3.2 किलोमीटर कर दिया गया है।
महिला अभ्यर्थियों को पहले 20 मिनट में 2.4 किलोमीटर की दौड़ पूरी करनी थी। नई नियमावली में यह अवधि बढ़ाकर 25 मिनट कर दी गई है।
रैंकर की दक्षता परीक्षा में बैठेंगे सिर्फ नागरिक पुलिस के जवान
नई नियमावली के मुताबिक रैंकर परीक्षा में सिर्फ नागरिक पुलिस के जवान ही शामिल होंगे।
पहले रैंकर परीक्षा में इंटेलीजेंस, पीएसी, सीबीसीआईडी, ट्रैफिक, आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा, घुड़सवार पुलिस के जवान बैठते थे जिससे प्रतिस्पर्धा कड़ी हो जाती थी।
जबकि इन विभागों की रैंकर परीक्षा में नागरिक पुलिस के जवानों को बैठने की इजाजत नहीं थी।
बसपा सरकार ने किया था बदलाव
पुलिस महकमे में उपनिरीक्षकों के खाली पदों में 50 फीसदी पर सीधी भर्ती का नियम है। शेष पद रैंकर से भरे जाते हैं।
पिछली बसपा सरकार ने सेवा नियमावली को बदलकर रैंकर के लिए लिखित परीक्षा का नियम लागू कर दिया था। इसमें अभ्यर्थियों को निबंध, गणित और सांख्यिकी सहित चार प्रश्नपत्र हल करने थे।
इस नियम ने उपनिरीक्षकों में हलचल मचा दी थी। कई उपनिरीक्षक ऐसे थे जो 30 से 32 साल का कार्यकाल पूरा कर चुके थे।
उन्हें फिर से गणित और सांख्यिकी की पढ़ाई करनी पड़ी। कड़ी परीक्षा के चलते 5400 पदों के लिए परीक्षा देने वाले करीब 55,000 अभ्यर्थियों में से 3100 ही पास हो सके थे।