वर्ष 1930 में भौतिकी में प्रो. सीवी रमन को उनके रमन इफेक्ट के लिए नोबेल
पुरस्कार मिला।
इसके बाद से भारत को दोबारा नोबेल पुरस्कार नहीं मिला।
संसाधन बढ़े, इसके बाद भी वैज्ञानिक नोबेल पुरस्कार जीतने में सफल नहीं हो
सके। आज 83 साल के बाद भारत नोबेल पुरस्कार के क्षेत्र में पिछड़ चुका है
काउंसिल
ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी के विज्ञान भवन में मंगलवार को पूर्व राष्ट्रपति
डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का जन्मदिन नवाचार (इनोवेशन) दिवस के तौर पर मनाया
गया।
इस कार्यक्रम में बच्चों को नवाचार के लिए जागरूक करने का काम किया।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के प्रमुख सचिव और सीएसटी के महानिदेशक डॉ.
हरशरण दास ने वैज्ञानिक विकास पर नाराजगी जताते हुए कहा कि हम आज भी
पिछलग्गू की भूमिका में हैं।
वर्ष 1930 में सीवी रमन ने एक नोबल पुरस्कार
भारत को दिया। उसके बाद हमारे संसाधनों का विकास तो हुआ इसके उलट वैज्ञानिक
विकास कहां है।
मेरा मानना है कि अगर नवाचार और समाज की जरूरत को देखते
हुए नए आविष्कार और शोधकार्य पर काम हो तो फिर से नोबल पुरस्कार जीतने में
मदद मिलेगी।
निदेशक डॉ. एमजेके सिद्दीकी ने
बताया कि भारत की समग्र प्रगति के लिए अपार संभावनाएं प्रदेश में हैं।
नोबल पुरस्कार जीतने के लिए बच्चों को अभी से तैयार करना होगा।
रिमोट
सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर के निदेशक डॉ. पीएन शाह, बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट
के वैज्ञानिक डॉ. सीएम नोटियाल, विज्ञान प्रसार के वैज्ञानिक डॉ. निमिष
कपूर ने नवाचार के लिए बच्चों को प्रेरित किया।
इस दौरान मुख्य अतिथि एलयू
के पूर्व वीसी ने खेल-खेल में बच्चों को गैलेक्सी, ऊर्जा, डस्टी प्लाज्मा
के बारे में जानकारी दी।