हिंदी दिवस पर लखनऊ में कई जगह आयोजन हुए। वेबिनार के जरिये जहां हिंदी को ज्यादा से ज्यादा अपनाने पर जोर दिया गया तो कहीं कोरोना गाइडलाइन के तहत बैठक कर हिंदी के उत्थान पर चर्चा की गई। बच्चों को कविताओं और कहानियों के जरिये हिंदी की विशालता समझाई गई तो हिंदी को तकनीकी भाषा बनाने पर भी जोर दिया गया।
विशुद्ध शब्दावली चिंतनीय
विशुद्ध शब्दावली और भाषा का प्रयोग चिंतनीय है। न सिर्फ पत्रकारिता से जुड़े लोग बल्कि सभी को इस तरफ ध्यान देना होगा। ये बातें हिमाचल प्रदेश केंद्रीय विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहीं। वह सोमवार को बीबीएयू में हिंदी दिवस पर जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय वेबिनार को संबोधित कर रहे थे।
वेब पत्रकारिता में हिंदी भाषा का अनुप्रयोग’ विषयक वेबिनार में बीबीएयू कुलपति प्रो. संजय सिंह ने कुछ विशेष क्षेत्रों विज्ञान, तकनीकी और प्रौद्योगिकी में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने की आवश्यकता बताई। वेबिनार में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय वर्धा के जनसंचार विभागाध्यक्ष प्रो. कृपाशंकर चौबे, राजस्थान विवि के प्रो. संजीव भनावत, महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी के प्रो. अनुराग दवे ने भी संबोधित किया। इस मौके पर हेड प्रो. गोविंद पांडेय, डॉ. अरविंद सिंह, डॉ. लोकनाथ, डॉ. महेंद्र कुमार पाढ़ी, डॉ. रचना गंगवार, डॉ. सुरेंद्र बहादुर शामिल थे। डीन प्रो. गोपाल सिंह ने अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
हिंदी हमारी मातृभाषा के साथ राजभाषा भी
डाक विभाग में सोमवार को मुख्य पोस्टमास्टर जनरल कौशलेंद्र कुमार सिन्हा ने मंथन सभागार में हिंदी पखवाड़े की शुरुआत की। उन्होंने मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर कहा कि हिंदी पूरे देश को जोड़ने वाली भाषा है और सरकारी कामकाज में भी इसे ज्यादा से ज्यादा अपनाया जाना चाहिए। हिंदी हमारी मातृभाषा के साथ-साथ राजभाषा भी है, ऐसे में हम सभी को रोजमर्रा के सरकारी कार्यों में हिंदी का प्रयोग करते हुए लोगों को भी इसके लिए प्रेरित करना चाहिए।
लखनऊ मुख्यालय परिक्षेत्र के निदेशक डाक सेवाएं कृष्ण कुमार यादव ने डाक विभाग के सचिव प्रदीप्त कुमार का संदेश पढ़ा, जिसमें उनके द्वारा इस बात पर जोर दिया गया कि डाक विभाग को अपनी नीतियों, योजनाओं एवं कार्यक्रमों का लाभ जन-जन तक पहुंचाने और इनके प्रभावी प्रसार-प्रचार एवं क्रियान्वयन के लिए राजभाषा हिंदी के प्रयोग को और अधिक बढ़ाने पर जोर दिया गया। निदेशक डाक सेवाएं मो. शाहनवाज अख्तर ने पखवाड़े के तहत होने वाले आयोजनों की जानकारी दी।
हिंदी के माध्यम से आमजन तक पहुंचाएं वैज्ञानिक उपलब्धियां
आईआईटीआर में निदेशक आलोक धवन ने कहा कि वैज्ञानिक अपने कार्यों को सरल हिंदी भाषा के माध्यम से आमजन तक पहुंचाएं, जिससे वैज्ञानिक उपलब्धियों का लाभ आम जन को मिल सके। हम एकमात्र वैज्ञानिक संस्थान है, जिसे भारत सरकार, गृह मंत्रालय, राजभाषा विभाग से गृह पत्रिकाओं के लिए सर्वोच्च पुरस्कार राजभाषा कीर्ति पुरस्कार योजना वर्ष 2019-20 के तहत द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है।
वहीं, एनबीआरआई में वेबिनार का आयोजन हुआ, जिसमें मुख्य वक्ता सैफई आयुर्विज्ञान संस्थान के वीसी प्रो. राजकुमार रहे। सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान में वेबिनार हुई, जिसमें प्रो. कुमार ने अपने द्वारा विकसित आयुर्वेद औषधि राज निर्वाण वटी के बारे में विस्तृत जानकारी दी। यूपी रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर में भी हिंदी दिवस पर आयोजन रहा।
अधिक से अधिक करें हिंदी का प्रयोग
पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल में वर्चुअल कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये डीआरएम डॉ. मोनिका अग्निहोत्री ने हिंदी सप्ताह की शुरुआत की। इस मौके पर अपर मुख्य राजभाषा अधिकारी राघवेन्द्र कुमार ने हिंदी का अधिक से अधिक उपयोग में लेने का आह्वान किया। इस अवसर पर अपर मंडल रेल प्रबंधक (तकनीकी), गौरव गोविल, अपर मंडल रेल प्रबंधक (परिचालन) शिशिर सोमवंशी, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संजय श्रीवास्तव एवं समस्त शाखा अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।
नृत्य के माध्यम से किया सम्मान
हिंदी भाषा के प्रति लोगों ने अपने-अपने ढंग से सम्मान प्रकट किया। ग्यारह वर्षीय इप्शिता अरोरा ने फेसबुक पर नृत्य के माध्यम से हिंदी भाषा के प्रति सम्मान व्यक्त किया। इप्शिता ने अपने परिचय के साथ हिंदी हिंदुस्तान की धड़कन, हम हैं हिंदुस्तानी, हिंदी भाषा हमको प्यारी है, हिंदी भारत मां की बिंदी, हिंदी भाषा राष्ट्र की भाषा व हिंदी हमारी, जय हिंदी हमारी पर प्रस्तुति दी।
हिंदी उत्सव में गूंजीं कविताएं
रूबरू फाउंडेशन की ओर से हिंदी उत्सव की शुरुआत की गई, जिसमें देशभर के हिंदी कहानीकार, कवियों ने हिस्सा लिया। आयोजन रात आठ बजे से रूबरू के पेज पर देखा जा सकता है। इस मौके पर फाउंडेशन के अध्यक्ष कहानीकार व कवि इरशाद राही ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आर्थिक रूप से कमजोर साहित्यकारों के इलाज की निशुल्क व्यवस्था करवाने की मांग की है।
रचनाकारों ने सुनाई कविताएं तो बच्चों ने लिखे स्लोगन
- एला फाउंडेशन की ओर से अंतरराष्ट्रीय काव्य सम्मलेन का आयोजन किया गया, जिसमें फिजी में बसे भारतीय कवि अमित अहलावत, न्यूजीलैंड से कवयित्री डॉ. सुनीता शर्मा, फिजी के हिंदी लेख संघ के अध्यक्ष जैनन प्रसाद, फिजी नेशनल यूनिवर्सिटी से हिंदी कवि डॉ. बलराम पंडित, विधि विश्वविद्यालय से डॉ. अलका सिंह, नागपुर से प्रो. अवधेश सिन्हा आदि कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। फिजी में भारतीय उच्चायोग की उच्चायुक्त व हिंदी लेखिका एवं कवि डॉ. पद्मजा ने प्रतिभाग किया और भारतीय संस्कृति के परिप्रेक्ष्य में अपनी कविताएं पढ़ीं। डॉ. अलका सिंह ने सामाजिक मुद्दों पर रचना पाठ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. रवींद्र प्रताप सिंह ने की।
- शब्द साहित्यिक संस्था के सेमिनार में हिंदी के सम्मान में वक्ताओं ने ‘हमारी शान है हिंदी, हमारी आन है हिंदी, ये महज भाषा ही नहीं पहचान है हिंदी... रचना पढ़ी। अध्यक्षता इंजी. वीपी श्रीवास्तव ने की। इस मौके पर इंजी. अशोक मेहरोत्रा, इंजी. मनोज श्रीवास्तव, इंजी. यूबी पांडेय, डॉ. कुमकुम श्रीवास्तव, इंजी. केके अग्रवाल व इंजी. देवकीनन्दन ‘शान्त’ ने रचनाएं पढ़ीं।
- सुरभि कल्चरल ग्रुुप की ऑनलाइन स्लोगन प्रतियोगिता हई, जिसमें छवि गोपाल सिंह प्रथम, आरोही मणि द्वितीय और रुद्र कुमार तृतीय स्थान पर रहे। प्रांजल पटेल, आदित्य गौतम, नामरा फातिमा ने सांत्वना पुरस्कार प्राप्त किया।
- आकाशगंगा' ट्रस्ट द्वारा आयोजित ई लिटरेरी आर्ट्स शो के पहले और दूसरे राउंड के 18 विभिन्न विधाओं के 32 बच्चों को ऑनलाइन पुरस्कृत और प्रमाण पत्र प्रदान किया गया। इस अवसर पर संस्थापक अध्यक्ष शीला पांडे, आकाशगंगा बाल पटल प्रभारी डॉ. ममता पाठक, विवेक पाठक ने बच्चों को संबोधित किया।
हिंदी भाषा में तकनीक विकसित करने पर दिया जोर
- विश्व आयुर्वेद मिशन एवं आरोग्य भारती की ऑनलाइन वेबिनार में एकेटीयू के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने टेक्नो नेशनलिज्म को बढ़ावा देने के लिए हिंदी भाषा में तकनीक विकसित करने पर जोर दिया। वेबिनार में डॉ. राजकमल विशेष सचिव आयुष विभाग, प्रो. बद्री नारायण तिवारी निदेशक गोविंद बल्लभ सामाजिक विज्ञान संस्थान प्रयागराज, डॉ. अशोक कुमार वार्ष्णेय राष्ट्रीय संगठन सचिव आरोग्य भारती, प्रो. जीएस तोमर अध्यक्ष विश्व आयुर्विज्ञान मिशन, डॉ. डीपी आर्य राष्ट्रीय सचिव विश्व आयुर्विज्ञान मिशन, डॉ. अवनीश पांडेय, सचिव उत्तरप्रदेश विश्व आयुर्वेद मिशन, डॉ. वंदना पाठक वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य ने अपने विचार रखे।
हमें टेक्नो नेशनलिज्म को बढ़ावा देने के लिए हिंदी भाषा में तकनीक विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करना होगा। आत्मनिर्भर भारत की मुख्य कड़ी क्षेत्रीय भाषाओं में शिक्षा और तकनीकी विकास है। - प्रो. विनय कुमार पाठक, कुलपति, एकेटीयू
हमारा देश विविध भाषाओं, बोलियों एवं संस्कृतियों का देश है। भारतीय सभ्यता, संस्कृति साहित्य एवं दर्शन का गौरवपूर्ण इतिहास हिंदी भाषा में उपलब्ध है। सभी अधिकारियों व कर्मचारियों को अधिक से अधिक हिंदी का उपयोग करना चाहिए। - डॉ. मोनिका अग्निहोत्री, डीआरएम, पूर्वोत्तर रेलवे लखनऊ मंडल