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हिंदी के लिए फायदेमंद है 'यूनीकोड'

Mon, 15 Sep 2014 01:38 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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यूनीकोड के आने से हिंदी प्रेमियों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। सोशल नेटवर्किंग साइट हों या फिर लेखन कार्य यूनीकोड का चलन तेजी से बढ़ रहा है, जो हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए सकारात्मक है।
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उक्त विचार हिंदी दिवस पर उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान में ‘सूचना क्रांति और हिंदी’ विषयक संगोष्ठी में सामने आए। संगोष्ठी के अलावा पद्मश्री केपी सक्सेना के नाटक का मंचन भी हुआ।

साहित्यकार विजय मल्होत्रा ने कहा कि तमिल नेता गोपाल स्वामी आयंगर ने राजभाषा हिंदी के विकास व प्रोत्साहन का काम किया, जो सराहनीय है।

कंप्यूटर व सूचना क्रांति ने भी हिंदी को बढ़ावा ही दिया है। पत्रकार के. विक्रमराव ने कहा कि ‘हिंदी काफी संघर्षों से गुजरती हुई वर्तमान स्वरूप तक पहुंची है।
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ऐसे शब्दकोश बनाने होंगे, जिसमें नए-नए शब्द हों। संस्थान के निदेशक डॉ. सुधाकर अदीब ने कहा कि हिंदी हमारी मां है, जीवन है, विचार है।

हिंदी की महायात्रा में प्रिंट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कार्यकारी अध्यक्ष उदय प्रताप सिंह ने कहा कि इंटरनेट से हिंदी को जोड़कर शिखर पर पहुंचाया जा सकता है।

वहीं, पूर्वोत्तर रेलवे ने (लखनऊ जंक्शन) में गोष्ठी का आयोजन किया। लखनऊ मंडल के सहायक परिचालन प्रबंधक पीके अस्थाना ने हिंदी को प्रोत्साहित करने पर बल दिया।

‘जिंदगी दर्द की बांसुरी हो गई’
‘आओ तुम्हें एक गीत सुनाते हैं, रिश्तों की खुशबू में नहलाते हैं, राहों में भी रिश्ते बन जाते हैं, ये रिश्ते भी मंजिल तक जाते हैं.’कविता के साथ कवि प्रमोद तिवारी ने कवि सम्मेलन की शुरुआत की।

फैजाबाद से आए जमुना प्रसाद उपाध्याय ने.‘मेरे बच्चे प्लास्टिक की थैलियां चुनते रह गए, नेमतें कुछ गिने-चुने कुनबों में बंट गईं.’और ‘पर्वतों से उतर गई गंगा, कुछ लटों में ठहर गई गंगा, जब मेरे गांव तक नहीं आई गंगा, क्या बताऊं किधर गई गंगा.’ रचनाएं सुनाईं।

कवि सूर्य कुमार पाण्डेय ने ‘हिंदी का हास्य कवि मुशायरे में क्या गया, शायरों ने कहा लव जिहाद हो गया.’ व ‘इधर की या उधर की कानाफूसी कर नहीं सकता, मैं कल हूं बात कोई दकियानूसी कर नहीं सकता.‘ पंक्तियां सुनाई। कानपुर से आए शिवकुमार सिंह ने ‘इस जहां से हमें जख्म इतने मिले, जिंदगी दर्द की बांसुरी हो गई....’।
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इस अवसर पर उदय प्रताप सिंह, सुधाकर अदीब, अमिता दुबे व गाजियाबाद की सरिता शर्मा ने भी रचनाएं पढ़ीं।
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