नदियां हमारे समाज में हमेशा से अहम भूमिका निभाती आई है। लेकिन आज इनका बेहतर ढंग से प्रबंधन जरूरी हो गया है।
पहले ये हमारी जरूरतों और पर्यावरण के संतुलन के अनुसार सामंजस्य बनाए रखती थीं, लेकिन आज ऐसा नहीं हो रहा है।
पर्यावरणविद् प्रो. राजीव सिन्हा ने गुरुवार को आंचलिक विज्ञान नगरी में आयोजित सोसाइटी ऑफ अर्थ साइंटिस्ट्स के छठवें स्थापना दिवस पर विद्यार्थियों को नदियों को सम्मान दिए जाने की वकालत की।
इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थी और पृथ्वी विज्ञानी जुटे थे। विद्यार्थियों ने प्राकृतिक आपदाओं और विभिन्न विज्ञान से जुड़ी थीम पर इस दौरान पोस्टर बनाए।
विज्ञान नगरी द्वारा इस मौके पर कई आर्ट एंड क्राफ्ट से जुड़ी गतिविधियों का आयोजन किया गया। प्रो. सिन्हा ने इस दौरान प्राकृतिक आपदाओं के बेहतर प्रबंधन में नदियों और उन्हें जोड़ने के दौरान सावधानी बरतने की भी बात की।
कार्यक्रम में बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पेलियोबॉटनी के निदेशक प्रो. सुनील बाजपेयी भी मौजूद रहे।
उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे एक खोज करने वाले की तरह सोचें और चीजों के समाधान खुद तलाशने का प्रयास करें।
यह साइंस के विकास के लिए महत्वपूर्ण योगदान देगा। वहीं इंस्टीट्यूट से आए डॉ. मुकुंद शर्मा और जीएसआई के डॉ. एससी त्रिपाठी ने भी अपने विचार रखे।