शेफाली मिश्रा...सीतापुर से आम आदमी पार्टी की सिपाही। दरअसल, सही मायने में इनकी जिंदगी एक भूकंप से शुरू हुई।
बात 1988 की है। उनके पिता बिहार के दरभंगा जिले में तैनात थे और एक भूकंप ने पूरी जिंदगी बदल दी।
एक छोटा सा कस्बा रातोंरात एक रिलीफ कैंप बन गया और राजीव गांधी जैसे सभी बड़े नेता वहां पहुंचने लगे।
39 बरस की शेफाली बताती हैं, 'मैंने ऐसा पहले कभी नहीं देखा था। उस एक तस्वीर ने मेरे बाल मन पर सोशल वर्क करने की अमिट छाप छोड़ दी।'
कई साल बाद, दिल्ली के लेडी श्री राम कॉलेज में दर्शनशास्त्र की छात्रा के रूप में शेफाली को फिर एक शख्सीयत ने प्रभावित किया।
ये उनकी प्रिंसिपल डॉ मीनाक्षी गोपीनाथ थीं। बकौल शेफाली, 'वो एक फाइटर थीं और हमेशा महिलाओं के अधिकारों के लिए खड़ी होती थीं।'
कितनी एजुकेटेड हैं शेफाली
उसके बाद शेफाली की मुलाकात हुई आंग सान सू की से जो उनके कॉलेज की ही एल्यूमनी थीं। शेफाली बताती हैं, 'मैंने जिंदगी में संघर्ष करना सीखा।
' दर्शनशास्त्र में तीसरी रैंक पास शेफाली ने सोशल वर्क से M.A में एडमिशन लिया। वह काम के सिलसिले में दिल्ली की झुग्गी-बस्तियों में गईं।
ओड़िशा में 1999 में आए चक्रवात और 2001 में गुजरात में आए भूकंप के बाद शेफाली मुम्बई भी गईं, जहां उन्होंने काउंसिलिंग साइकॉलजी की पढ़ाई की।
शेफाली ने छत्तीसगढ़ सरकार की कुछ अहम नीतियों के लिए भी काम किया है। उन्होंने फूड एंड एग्रीकल्चरल ऑर्गनाइजेशन और यूएन डेवलपमेंट प्रोग्राम के लिए भी काम किया है।
इसके अलावा वर्तमान में वह लंदन स्कूल ऑफ एकोनॉमिक्स और चीन की हीनन एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से पढ़ाई भी कर रही हैं।
कैसे जुड़ना हुआ 'आप' से
सीतापुर लोकसभा प्रत्याशी शेफाली मिश्रा का 'आप' से जुड़ना यूं ही नहीं हुआ।
वह कहती हैं कि बतौर यूएन कर्मचारी जब वह दिल्ली आईं थीं, तो पूरी दिल्ली अन्ना आंदोलन की वजह से सड़कों पर उतरी थी।
शेफाली कहती हैं, ' हम अन्ना को लेकर बहुत उत्सुक थे लेकिन उनके प्रोटेस्ट को लेकर मैं बहुत ज्यादा उत्साहित नहीं थी। ' हालांकि जब शेफाली दूसरी बार अन्ना के आंदोलन में आईं, तो वह बदल गईं।
उन्होंने अन्ना आंदोलन से जुड़ने का उस वक्त मन बनाया, जब अरविंद ने बगैर राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले लोगों से भी राजनीति में आने का आह्वान किया और यहा व्याप्त गंदगी को साफ करने की अपील की।
लड़ाई एक विचारधारा से है।
शेफाली जब आम आदमी पार्टी से जुड़ गईं, तो उनके सामने चंदौली और सीतपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने का विकल्प रखा गया। उन्होंने सीतापुर के लिए हामी भरी।
इस सीट से शेफाली की लड़ाई बसपा की सांसद कैसर जहां से है। शेफाली बताती हैं कि वह लोगों से वोट देने या जाति की बात नहीं करती हैं, लेकिन उनसे मिलने वाले लोग अक्सर एक शब्द 'ब्राह्मण' कहते हैं।
शेफाली इसे एक प्रयोग का नाम देती हैं और कहती हैं कि यहां उनकी लड़ाई एक विचारधारा से है।
शादी नहीं की है शेफाली ने
घूमने-फिरने की शौकीन शेफाली ने शादी नहीं की है। लोगों की तकलीफों को अपना समझने वाली शेफाली का कहना है कि उन्हें ऐसा करना अच्छा लगता है।
अगर बात शेफाली के परिवार की करें, तो उनके पिता झारखंड के मुख्य सचिव पद से रिटायर हो चुके हैं। मां दिल्ली पब्लिक स्कूल में पढ़ाती हैं।
उनका एक छोटा भाई भी है, जो ऑक्सफोर्ड में काम करता है।
देखने वाली बात होगी कि आखिर 'आप' की इस कर्मठ उम्मीदवार के हक में सीतापुर लोकसभा सीट की जनता क्या फैसला सुनाती है।