कैसरबाग स्थित सुखवीर सिंघल आर्ट गैलरी में रविवार को लोक संस्कृति शोध संस्थान की ओर से कार्यक्रम
लखनऊ। कैसरबाग स्थित सुखवीर सिंघल आर्ट गैलरी में रविवार को लोक संस्कृति शोध संस्थान की ओर से कार्यक्रम हुआ। 81वीं लोक चौपाल में कलाविद् प्रो. सुखवीर सिंघल को याद किया गया और उनकी कृतियों में लोकबोध और शास्त्रीय दृष्टि के समन्वय पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि प्रो. सिंघल भारतीय आधुनिक कला के ऐसे महत्वपूर्ण हस्ताक्षर रहे हैं जिनकी रचनात्मक दृष्टि में लोक संवेदना का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। उनकी कला और विचारधारा नई पीढ़ी को सांस्कृतिक चेतना से जोड़ने का कार्य कर रही है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता चौपाल चौधरी विमल पंत एवं डॉ. रामबहादुर मिश्र ने संयुक्त रूप से की। आर्ट गैलरी के व्यवस्थापक राजेश जायसवाल ने कहा कि लोक और कला का सतत संवाद हमारी सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए रखता है। प्रो. सुखवीर सिंघल की नातिन प्रियम चंद्रा ने बताया कि वे अपने नाना के कृतित्व के संरक्षण-संवर्द्धन के लिए तत्पर हैं और उसी क्रम में उनकी कृतियों पर केंद्रित तीन खंडों का प्रकाशन कर रही हैं जिसमें पहला खंड इसी वर्ष प्रकाशित हुआ है।