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ट्रामा सर्जरी में एमसीएच कोर्स शुरू करने की तैयारी

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शोध का सर्वोच्च अवार्ड प्रो. संजय बिहारी को
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बेस्ट एमसीएच स्टूडेंट डॉ. डी कृष्णा व बेस्ट डीएम स्टूडेंट अवार्ड डॉ. सुब्रत को
एसजीपीजीआई का दीक्षांत समारोह आज
एसजीपीजीआई का दीक्षांत समारोह शनिवार को होगा। इसमें शोध का सर्वोच्च अवार्ड न्यूरो सर्जरी विभागाध्यक्ष प्रो. संजय बिहारी को दिया जाएगा। प्रो. एसआर नायक अवार्ड उत्कृष्ट शोध के लिए दिया जाता है।
विभागाध्यक्ष डॉ. संजय बिहारी ने ब्रेन ट्यूमर से जुड़ी बीमारियों में सर्जरी की नई तकनीक विकसित की है। इसे अन्य संस्थानों ने अपनाया। इसमें क्रेनियल वर्टिब्रल जंक्शन के ट्यूमर, जंक्शन में बनावटी खराबी, स्कल बेस ट्यूमर, एन्यूरिज्म, ब्रेन ट्यूमर की मिनिमल इनवेसिव सर्जरी शामिल हैं। इस पर उन्होंने 300 से अधिक शोध किए हैं। सात किताबें प्रकाशित हैं। सौ से अधिक बुक चैप्टर भी प्रकाशित किए हैं। उन्हें विभिन्न स्थानों की ओर से 50 से अधिक अवार्ड दिए जा चुके हैं। डॉ. संजय बिहारी ने बताया कि उनकी भी उपलब्धियां हैं, उसमें यहां के हर डॉक्टर और कर्मचारी का योगदान है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1992 में एसजीपीजीआई में रेजीडेंट के तौर पर प्रवेश लिया था। फिर यहीं के होकर रह गए हैं। यहां करीब 7500 से अधिक सर्जरी कर चुके हैं।
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दोपहर तीन बजे शुरू होगा समारोह
डीन प्रो. एसके मिश्रा ने बताया कि दीक्षांत समारोह शनिवार दोपहर तीन बजे श्रुति प्रेक्षागृह में शुरू होगा। समारोह के मुख्य अतिथि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन होंगे। अध्यक्षता राज्यपाल आनंदीबेन पटेल करेंगी।
टीबी बैक्टीरिया पर शोध के लिए दोहरा अवार्ड
क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी के डॉ. सुब्रत आर्य को बेस्ट एमसीएच स्टूडेंट के रूप में प्रो. एसएस अग्रवाल और प्रो. आरके शर्मा अवार्ड दिया जाएगा। हालांकि फेलोशिप के लिए इंग्लैंड में होने के चलते वह दीक्षांत समारोह में नहीं रहेंगे। विभागाध्यक्ष प्रो. आरएन मिश्रा ने डॉ. सुब्रत के शोध की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अब तक शरीर में बैक्टीरिया छिपे होने का पता लगाने के लिए पीपीडी (मांटेक्स) टेस्ट किया जाता है। इसमें 60 फीसदी तक जानकारी मिल पाती है। डॉ. सुब्रत ने टी सेल की खोज की, जिसके जरिये 97 फीसदी तक बैक्टीरिया की जानकारी मिल रही है।
डॉ. डी कृष्णा को बेस्ट एमसीएच अवार्ड
न्यूरो सर्जरी विभाग के डॉ. डी कृष्णा को डॉ. आरके शर्मा अवार्ड दिया जाएगा। यह बेस्ट एमसीएच स्टूडेंट को दिया जाता है। डॉ. कृष्णा ने बताया कि उन्होंने ट्राइजेमल न्यूरालजिया में नर्व को दबाने वाली अज्ञात नसों की खोज की है। यह नर्व सिर और चेहरे के बीच में होती है। इसके दबने पर जबड़े से लेकर गाल तक असहनीय दर्द होता है। इसके लिए दो नसों के बीच टेफलाल लगाया जाता है। यह सुई जैसा होता है, जो दोनों नसों को चिपकने नहीं देता है। इसमें कई अज्ञात नसें थीं, जिनके बारे में अब तक जानकारी नहीं थी। ऐसे में सर्जरी के बाद भी दर्द बना रहता था। इन नसों के बारे में जानकारी मिलने से सर्जरी के वक्त उन्हें भी अलग कर दिया जाता है। इससे दोबारा दर्द होने की आशंका खत्म हो जाती है। डॉ. कृष्णा ने एमसीएच में सात रिसर्च पेपर प्रकाशित किए हैं।
तीन को विशिष्ट सहित 151 अवार्ड
दोपहर बाद तीन बजे श्रुति प्रेक्षागृह में होने वाले समारोह में संस्थान की ओर से चार विशिष्ट अवार्ड दिए जाएंगे। खास बात यह है कि इस बार चार अवार्ड में दो अवार्ड एक ही डॉक्टर को मिलेगा। न्यूरो सर्जरी में विभागाध्यक्ष के साथ ही बेस्ट एमसीएच स्टूडेंट को भी अवार्ड मिलेगा। इस दौरान कुल 151 डिग्रियां दी जाएंगी। इसमें पीएचडी के छह, डीएम के 34, एमसीएच के 18, एमडी 22, एमएचए के छह एवं 33 बीएससी नर्सिंग, विभिन्न विभाग के 28 प्रशिक्षु को डिग्री दी जाएगी।
पीजीआई ट्रॉमा सर्जरी में एमसीएच कोर्स शुरू करने की तैयारी
एसजीपीजीआई में ट्रॉमा सर्जरी विभाग में एमसीएच कोर्स शुरू करने की तैयारी है। इसका प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। उम्मीद है कि अगले सत्र से इसकी शुरुआत हो जाएगी। इससे ज्यादा से ज्यादा ट्रॉमा विशेषज्ञ तैयार होंगे। इसी तरह यहां चल रहे एक साल के पोस्ट डॉक्टोरल सर्टिफिकेट कोर्स (पीडीसीसी) का समय बढ़ाकर दो साल कर दिया गया है। इससे भी चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ेगी। यह जानकारी निदेशक प्रो. राकेश कपूर ने दी।
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दीक्षांत समारोह की पूर्व संध्या पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने बताया कि संस्थान को एमसीआई ने नियोनेटोलॉजी में डीएम की दो सीटें को मान्यता दी है। इसी तरह एमडी एनेस्थीसियोलॉजी में 14 सीटें, रेडियोलॉजी में एमडी की चार सीटें मिली हैं। गैस्ट्रोइंटेरोलॉजी सर्जरी में चार एमसीएच स्वीकृत हुई हैं। इस विभाग में अब 10 सीटें हो गई हैं। इन सीटों के बढ़ने से भी संस्थान को अधिक संख्या में नए विशेषज्ञ मिल जाएंगे।
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