नेताजी की आजमगढ़ रैली में मंच पर एक बैनर लगा था। जिस पर लिखा था, ‘जागो समाजवादियों।’
यह आह्वान समाजवादियों को कितना जगाएगा, यह तो बाद में पता चलेगा, पर विपक्ष को चुटकी लेने का मौका जरूर मिल गया है।
विपक्ष के लोग कह रहे हैं नेताजी कहीं न कहीं नए समाजवादियों की तेजी से घबड़ा गए हैं।
उन्हें लगता है कि पुराने समाजवादियों को सक्रिय न किया गया तो हरदोई वाले समाजवादी की तरह अन्य भी चौधरी साहब जैसे पुराने समाजवादियों को धक्का देकर पीछे कर देंगे।
नेताजी जानते हैं कि उम्मीदों की साइकिल तभी रफ्तार पकड़ेगी जब उसके लिए रास्ता बनाने वाले होंगे। जो सिर्फ सवारी करने वाले हैं, उनसे तो रफ्तार बढ़ेगी नहीं।
इसलिए उन्हें आजमगढ़ में ‘जागो समाजवादियों’ का आह्वान करना पड़ा।
सच क्या है, यह तो नेताजी जानें लेकिन बैनर पर लिखी इबारत ने इस बात की चुगली जरूर कर दी है कि नेताजी को कहीं न कहीं इस बात का डर सताने लगा है कि खांटी समाजवादियों को न जगाया गया तो संकट खड़ा हो जाएगा।