खां साहब के स्टाफ ने बगावत कर दी है। बगावत की ये आग एक-दो दिनों से नहीं बल्कि महीनों से सुलग रही थी।
स्टाफ वाले बगावत न करते तो क्या करते? खां साहब को जिस दिन जाना होता, उस दिन कम से कम पांच ट्रेनों से उनका आरक्षण कराया जाता।
उन्हें यह भी नहीं बताया जाता कि किस ट्रेन से वह जाएंगे। खुदा न खास्ता अगर किसी ट्रेन में वेटिंग हुई तो समझो कि आफत आ गई।
आए दिन की किच-किच से निजी स्टाफ ने काम छोड़ा तो खां साहब के सबसे खास एक ठाकुर साहब ने निजी स्टाफ के एक ठाकुर को समझाने का प्रयास शुरू कर दिया।
उन्होंने समझाने के दौरान कहा कि खां साहब नेक दिल इंसान हैं...गुस्से में अगर कुछ कह दिया तो उसे भूलकर काम पर वापस लौट जाओ।
निजी स्टाफ के ठाकुर साहब ने इस पर कह दिया कि अगर खां साहब अच्छे हैं तो आप अपना स्टाफ वहां भेज दें और हम लोगों को अपने पास रख लें। फिर क्या था, ठाकुर साहब की बोलती बंद हो गई।