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UP: भाजपा के लिए ही आफत बन गया सदस्यता अभियान

Sat, 28 Mar 2015 11:58 PM IST
अखिलेश वाजपेयी/ अमर उजाला, लखनऊ
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भारतीय जनता पार्टी अपने सदस्यता अभियान के जाल में खुद ही फंस गई दिख रही है। प्राथमिक सदस्यता के नए रिकॉर्ड तो बन गए, पर मामूली सदस्य किसे कहा जाए और सक्रिय सदस्य किसे माना जाए, यह पेंच फंस गया।
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रणनीतिकारों के सामने भगवा खेमे के मूल काडर और बाहर से आने वालों में फर्क करने को लेकर नई समस्या खड़ी हो गई है। साथ ही अगर दावों को आधार बनाकर सक्रिय सदस्यता दी जाती है तो कई जगह संगठन उन लोगों के कब्जे में जाने का संकट खड़ा हो गया है जो पार्टी की रीति-नीति से अभी पूरी तरह परिचित नहीं हैं।

पार्टी संविधान के मुताबिक दल का पदाधिकारी होने के लिए सक्रिय सदस्य होना जरूरी है। सक्रिय सदस्य उसे ही बनाया जा सकता है जिसने कम से कम सौ प्राथमिक सदस्य बनाए हैं।
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मोबाइल फोन पर मिस्ड कॉल से सदस्य बनाने के अभियान के कारण प्रदेश में पार्टी के सदस्यों की संख्या तो 30 लाख से बढ़कर 1.46 करोड़ पहुंच गई, पर सक्रिय सदस्यता को लेकर संकट खड़ा हो गया है।

पीछे रह गए पुराने कार्यकर्ता

कई स्थानों पर बाहर से आए बड़े नेताओं ने पार्टी के सामान्य कार्यकर्ताओं की ओर से बनाए गए सदस्यों की सूची हासिल कर उसे अपनी सदस्यता दिखा दी। इसके चलते सियासी तिकड़मबाज इन नेताओं की सदस्यता हजारों में पहुंच गई पर जिन्होंने ग्राउंड पर मेहनत की वे पीछे हो गए।

यही वजह है कि रणनीतिकारों ने सदस्यता की गहन जांच-पड़ताल की योजना बनाई है। इसके लिए 29, 30 व 31 को जिलों में बैठकें बुलाकर सदस्यता का हिसाब-किताब तैयार करने को कहा गया है।

साथ ही 2 अप्रैल को क्षेत्रवार बैठकें बुलाकर जिलों के हिसाब-किताब से निकले निष्कर्षों पर क्षेत्रीय आधार पर उसकी छानबीन करने का फैसला किया गया है।

इसके बाद पूरा रिकॉर्ड प्रदेश मुख्यालय आ जाएगा। यहां मिलाने के बाद 10 अप्रैल से सदस्यता के दोहरे सत्यापन का काम शुरू  किया जाएगा। एक सत्यापन जिला स्तर पर होगा और दूसरा क्षेत्रीय स्तर के लोगों द्वारा किया जाएगा।

इस तरह किया जाएगा सत्यापन

सत्यापन के लिए क्षेत्रीय स्तर पर क्षेत्रीय अध्यक्ष, क्षेत्रीय महामंत्री, क्षेत्रीय संगठन मंत्री व क्षेत्रीय प्रभारी की टीम बनाई जाएगी। जिला स्तर पर जिला अध्यक्ष, जिला प्रवासी, जिला सदस्यता प्रमुख, जिला प्रवासी, जिला महामंत्री सहित कम से कम आठ लोगों की टीम बनाने का फैसला किया गया है।

ये लोग प्राथमिक सदस्यता की गांव व क्षेत्रवार सूची के आधार पर सदस्य बनने वालों से मिलकर व कॉल सेंटर के जरिये संपर्क करके पूछेंगे कि उन्हें किसने सदस्य बनाया है।

अप्रत्याशित सदस्यता कराने वालों पर नजर: इस अभियान में मुख्य रूप से उन लोगों पर नजर रखने की रणनीति है जिन्होंने सैकड़ों व हजारों में प्राथमिक सदस्यता करा डालने का दावा करते हुए सूची दी है। इसके लिए उनकी सूची की विशेष जांच-पड़ताल व सत्यापन का फैसला किया गया है। इस काम के लिए लोग अलग से लगाए जा रहे हैं।
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यह कहना है प्रदेश के सदस्यता प्रमुख का

भाजपा के प्रदेश सदस्यता प्रमुख स्वतंत्र देव सिंह का कहना है कि यह बात सही है कि कुछ के सदस्यता के आंकड़े हजारों में हैं। पर, इससे पार्टी के पुराने व निष्ठावान नेताओं व कार्यकर्ताओं को चिंतित नहीं होना चाहिए।

इनकी अनदेखी व उपेक्षा का सवाल ही नहीं है। इन्हें अपने मन से यह आशंका निकाल देनी चाहिए कि आंकड़ों के चक्कर में उनकी मेहनत की अनदेखी हो जाएगी। सदस्यता की गहन जांच-पड़ताल कराने का फैसला किया गया है।

अगर कहीं बड़ी-बड़ी संख्या में सदस्यता कराने वालों के स्तर पर गड़बड़ मिली तो वह पार्टी का सक्रिय सदस्य नहीं बन पाएगा।
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