प्रदेश में बीएड कर रोजगार पाने की उम्मीद लगाए एक लाख से अधिक छात्रों का भविष्य फंस गया है।
प्रदेश के अधिकतर विश्वविद्यालयों ने अभी तक इनकी परीक्षाओं का कार्यक्रम तक घोषित नहीं किया है।
जबकि, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) के मुताबिक 200 दिन का शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा होते ही परीक्षा की तिथियां घोषित कर दी जानी चाहिए, मगर ऐसा नहीं हो रहा है।
ट्रेनिंग खत्म होते ही होनी चाहिए परीक्षा
उत्तर प्रदेश में शिक्षण सत्र 2013-14 में गोरखपुर विश्वविद्यालय ने बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा कराई थी। प्रवेश परीक्षा के बाद छात्र-छात्राओं को दाखिला देने की प्रक्रिया पूरी होने के साथ पढ़ाई शुरू हो गई।
एनसीटीई नियम के मुताबिक 160 दिन की थ्योरी की कक्षाएं व 40 दिन की प्रैक्टिस टीचिंग यानी 200 दिन का शिक्षण-प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरा होते ही परीक्षाएं शुरू करा दी जानी चाहिए।
उत्तर प्रदेश स्ववित्त पोषित महाविद्यालय एसोसिएशन के अध्यक्ष विनय त्रिवेदी के मुताबिक लखनऊ विश्वविद्यालय के 4000 व रुहेलखंड विश्वविद्यालय बरेली के करीब 5000 छात्र-छात्राओं की परीक्षाएं कराई गई हैं।
अचानक निरस्त हो गई परीक्षा
विनय त्रिवेदी के अनुसार करीब 1,15,000 छात्र-छात्राओं की परीक्षाएं होनी अभी बाकी है।
उन्होंने कहा कि काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय वाराणसी ने बीएड परीक्षा का कार्यक्रम घोषित करने के बाद अचानक निरस्त कर दिया गया। कानपुर विश्वविद्यालय ने अभी तक परीक्षा कार्यक्रम घोषित नहीं किया गया है।
दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय गोरखपुर, भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय आगरा का भी यही हाल है। उन्होंने जल्द कार्यक्रम घोषित करते हुए परीक्षाएं कराने की मांग की है।