प्रो. विनय कुमार पाठक
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के कुलपति प्रो. विनय पाठक के सहयोगी अजय मिश्रा की जमानत सशर्त मंजूर कर ली है। साथ ही कहा कि मामले की जांच अब सीबीआई को सौंप दी गई है, उसमें कितना वक्त लगेगा कहना मुश्किल है। मामले में अभी तक विनय पाठक से किसी एजेंसी ने पूछताछ भी नहीं की है।
न्यायमूर्ति राजेश सिंह चैहान की एकल पीठ ने अजय को जमानत देते हुए कहा है कि वह रिहा होने के एक सप्ताह के भीतर सीबीआई के विवेचनाधिकारी के समक्ष उपस्थित होगा और इसमें पूरा सहयोग करेगा। मालूम हो कमीशनखोरी समेत कई अन्य गंभीर आरोप लगाते हुए प्रो. पाठक और सह-अभियुक्त अजय मिश्रा के खिलाफ इंदिरानगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। आरोप लगाने वाले डेविड मारियो डेनिस का कहना है कि पाठक के आगरा विवि के कुलपति रहने के दौरान उसके कम्पनी द्वारा किए गए कार्यों के भुगतान के लिए अभियुक्तों ने 15 प्रतिशत कमीशन वसूला। एफआईआर में यह भी कहा गया कि वादी को उक्त अभियुक्तों से अपनी जान को खतरा है। वहीं, अजय मिश्रा की ओर से हाईकोर्ट में बताया गया कि उस पर लगाए गए आरोप गलत हैं। इसी कारण कथित वसूली के कई दिन बीत जाने के बाद एफआईआर दर्ज कराई गई। संवाद