इलाहाबाद विश्वविद्यालय की संस्कृत विभागाध्यक्ष प्रो. किश्वर जबीं नसरीन पहले ‘जनेश्वर मिश्र संस्कृत विदुषी सम्मान’ से अलंकृत की गईं।
यह सम्मान उन्हें उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान की ओर से गोमतीनगर स्थित संगीत नाटक अकादमी के संत गाडगे प्रेक्षागृह में जनेश्वर मिश्र की जयंती पर आयोजित सम्मान समारोह में दिया गया।
मुख्य अतिथि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उन्हें सम्मानस्वरूप 1.51 लाख रुपये का चेक, पुष्प गुच्छ और स्मृति चिह्न प्रदान किया।
इस अवसर पर जनेश्वर मिश्र पर आधारित लघु फिल्म भी दिखाई गई। इसके साथ ही कथक शैली में संस्कृत नृत्य नाटिका ‘आम्रपाली’ का मंचन किया गया।
मोहम्मद हनीफ खां शास्त्री लिखित नाटक ‘आम्रपाली’ प्राचीन भारतीय शासक अजातशत्रु और आम्रपाली की कहानी है।
समारोह में राजनीतिक पेंशन मंत्री राजेंद्र चौधरी, व्यावसायिक शिक्षक व कौशल विकास राज्यमंत्री अभिषेक मिश्रा, प्रमुख सचिव (भाषा) शैलेश कृष्ण, उप्र संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष शंकर सुहैल, उप्र हिंदी संस्थान के कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. उदय प्रताप सिंह आदि उपस्थित रहे।
‘अरबी की मदद से सीखी संस्कृत’
प्रो. किश्वर जबीं नसरीन ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि बचपन में अरबी सीखी।
छठी क्लास से ही संस्कृत पढ़ी। चूंकि, अरबी व संस्कृत में उच्चारण पर बहुत ध्यान दिया जाता है, इसलिए अरबी से संस्कृत सीखने में काफी मदद मिली।
इसके अलावा अभिभावकों का विशेष सहयोग रहा। उन्होंने कहा कि भाषाओं को मजहबी खांचों में नहीं बांटा जाना चाहिए।
उसकी मिठास का अहसास करना चाहिए। नसरीन ने संस्कृत में शोध कार्य की आवश्यकता जताई। उन्होंने कहा कि फिलहाल वे कवि कालिदास को पढ़ रही हैं।