रायबरेली में मंगलवार के कार्यक्रम रद्द कर प्रियंका भले ही अचानक दिल्ली लौट गईं पर इस बार यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि वह न केवल सक्रिय राजनीति में आने का मन बना चु्की हैं बल्कि रायबरेली से लोकसभा का चुनाव भी लड़ेंगी।
पिछले कुछ समय से रायबरेली में प्रियंका की सक्रियता को देखते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से भी ऐसी मांग उठने लगी है। अभी दो महीने पहले ही प्रियंका ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण कार्यक्रम कराया था।
यह कार्यक्रम रायबरेली के गेस्टहाउस भुएमऊ में आयोजित हुआ था। पिछले कुछ महीनों में प्रियंका ने रायबरेली के कई दौरे किए। वह रायबरेली के सक्रिय कार्यकर्ताओं से लगातार संपर्क में रहती हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष और रायबरेली से सांसद सोनिया गांधी के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए प्रियंका को चुनावी मैदान में उतारने की चर्चा तेज होने लगी है।
रायबरेली के कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मानें तो वह पिछले कुछ समय से रायबरेली में संगठन को मजबूत करने को लेकर बेहद चिंतित दिखीं।
उन्होंने सभी कार्यकताओं को इसके लिए कड़ी मेहनत करने का निर्देश दिया है। उन्होंने जनता की हर समस्या को अधिकारी स्तर पर उठाकर उसके समाधान के लिए लगातार प्रयत्नशील रहने की हिदायत दी है।
गौरतलब है, पिछले विधानसभा चुनाव में पार्टी को यहां करारा झटका लगा है। कांग्रेस इस संसदीय सीट की एक भी विधानसभा सीट पर जीत हासिल नहीं कर पाई थी।
सूत्रों का कहना है कि कार्यकर्ता प्रियंका को रायबरेली से उतारकर एक नया संदेश देने का दबाव बना रहे हैं। उनका कहना है कि क्षेत्र में प्रियंका की सक्रियता ने पार्टी के लिए बेहतर माहौल बना दिया है। ऐसे में अगर वह सक्रिय राजनीति में कदम रखती हैं तो लोगों में एक अच्छा संदेश जाएगा।
रायबरेली या अमेठी?
कयास यह भी लग रहे हैं कि मौजूदा सियासी माहौल को देखते हुए राहुल गांधी रायबरेली से चुनाव लड़ें जबकि उनकी सीट अमेठी से प्रियंका अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत करें।
यह तर्क देने वालों का दावा है कि रायबरेली की तुलना में अमेठी से प्रियंका का ज्यादा वास्ता रहा है। वैसे भी, रायबरेली प्रधानमंत्री देने वाली सीट मानी जाती है। संकेत देने के लिहाज से भी कांग्रेस राहुल कोरायबरेली से उतारने का फैसला कर सकती है।