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यूपी में बिजली का निजीकरण: मंगलवार से काला फीता बांधकर काम करेंगे बिजलीकर्मी, कर्मचारी संगठन लामबंद

Mon, 09 Dec 2024 10:45 PM IST
रोहित मिश्र अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

Electricity system in UP: यूपी में बिजली के निजीकरण की अटकलों के बीच बिजली कर्मियों ने संघर्ष की चेतावनी दे दी है। कर्मचारी संगठन पूरे प्रदेश में काला फीता बांधकर काम करेंगे। 
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यूपी में बिजली व्यवस्था - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पूर्वांचल और दक्षिणांचल के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मचारी मंगलवार के बांह पर काली पट्टी बांध कर कार्य करेंगे। कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री और उर्जा मंत्री से मांग की है कि निजीकरण न किया जाए, क्योंकि इससे कार्मिक और उपभोक्ता दोनों को नुकसान उठाना पड़ेगा।विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि ग्रेटर नोएडा और आगरा में किए गए निजीकरण के प्रयोगों की समीक्षा की जाए, क्योंकि यहां निजीकरण के बाद कोई प्रगति नहीं हुई है। संघर्ष समिति के पदाधिकारियों राजीव सिंह, जितेन्द्र सिंह गुर्जर, गिरीश पांडेय, महेन्द्र राय,सुहैल आबिद, पीके दीक्षित, राजेंद्र घिल्डियाल, चंद्र भूषण उपाध्याय आदि ने कहा कि निजीकरण का फैसला पूरी तरह से गलत साबित होगा। इसलिए निजीकरण के विरोध में मंगलवार से बाह पर काली पट्टी बांध कर कार्य किया जाएगा।

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नहीं होने दी जाएगी आरक्षण की अनदेखी
पावर ऑफिसर्स एसोसिएशन ने कहा कि निजीकरण के जरिए आरक्षण को खत्म करने का साजिश की जा रही है। इसका हर स्तर पर विरोध किया जाएगा। दलित एवं पिछड़े वर्ग के अभियंता बांह पर काली पट्टी बांध कर कार्य करेंगे।एसोसिएशन की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई बैठक में विभिन्न स्थानों से जुड़े अभियंताओं ने कहा कि निजीकरण से पहले आरक्षण का फॉर्मूला जारी होना चाहिए, क्योंकि पीपीपी मॉडल में आरक्षण की व्यवस्था को लेकर अभी तक कोई तथ्य सामने नहीं आया है। बैठक में एसोसिएशन के कार्यवाहक अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा, महासचिव अनिल कुमार, सचिव आरपीकेन, संगठन सचिव बिंदा प्रसाद, विनय कुमार आदि मौजूद रहे। ब्यूरो

चेक मीटर के नियमों का नहीं हो रहा पालन
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि पावर काॅर्पोरेशन पीपीपी मॉडल की आड़ में स्मार्ट प्रीपेड मीटर निर्माता कंपनियों को उपकृत करने की कोशिश में लगा हुआ है। प्रदेश में करीब चार लाख से ज्यादा स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगा दिए गए, लेकिन मुश्किल से 2500 से 3000 चेक मीटर ही स्थापित किए गए। नियमानुसार पांच फीसदी चेक मीटर जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि पावर काॅर्पोरेशन की ओर से चेक मीटर के नियमों का पालन नहीं कराया जा रहा है। 

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