विद्युत उपभोक्ता परिषद ने पॉवर कॉर्पोरेशन पर सितंबर 2024 में ही एक कंपनी को सलाहकार कंपनी (टीए) के रूप में रखने का आरोप लगाया है। परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि जब प्रबंधन ने ऊर्जा संगठनों को अंधेरे में रखकर टीए की नियुक्ति कर ली थी तो बीते 25 मार्च को दोबारा ग्रांट थार्नटन को रखने की जरूरत क्यों पड़ी, इसका खुलासा किया जाए।
उन्होंने प्रबंधन से पूछा कि सितंबर में टीए के रूप में चुनी गई कंपनी ने क्या सलाह दी और उस पर कितना रुपया खर्च हुआ, इसका ब्योरा सार्वजनिक किया जाए। वर्मा ने कहा कि पॉवर कॉर्पोरेशन प्रबंधन को सबसे पहले अपने कार्मिकों और उपभोक्ताओं को सही बात बताना चाहिए। जब सितंबर 2024 में निजीकरण का मसौदा गुपचुप तरीके से तैयार कराया जा रहा था तो वह किसके इशारे पर किया जा रहा था? क्या उसमें निजी घरानों की सहभागिता थी? यदि ऐसी कोई बात नहीं है तो गुपचुप कार्रवाई क्यों की गई?
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अभियंताओं और कर्मचारियों का हो रहा शोषण : समिति
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने पॉवर कॉर्पोरेशन प्रबंधन पर अभियंताओं और कार्मिकों का शोषण करने का आरोप लगाया है। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि ऊर्जा मंत्री को इस मुद्दे पर चुप्पी तोड़नी चाहिए और निजी कंपनी के साथ मिलीभगत कर घोटाला करने वाले निदेशक वित्त निधि नारंग पर तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। लेकिन, सारा गुस्सा हक की लड़ाई लड़ रहे कार्मिकों पर उतारा जा रहा है।
कर्मचारियों को परेशान करने के लिए उनका स्थानांतरण किया जा रहा है। यही नहीं उनका वेतन काटा जा रहा है और कर्मचारी सेवा नियमावली में मनमाना संशोधन किया गया है। इससे औद्योगिक अशांति फैल रही है। अभियंताओं को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के नाम पर घंटों एक जगह बांधे रखना, उनके साथ अमर्यादित भाषा का प्रयोग कर उन्हें धमकी देना यह सब सिर्फ निजीकरण के लिए किया जा रहा है। इसे बिजली कर्मी स्वीकार नहीं करेंगे।
चार जून को होगा प्रदर्शन
संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल बिजली निगमों के निजीकरण के विरोध में चार जून को सभी जिलों में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है। संयुक्त किसान मोर्चा के साथ एक मंच पर 16 किसान संगठन विरोध में हिस्सा लेंगे। किसान संगठन निजीकरण का निर्णय वापस लेने, बिजली टैरिफ में बढ़ोतरी तथा स्मार्ट मीटर लगाने का प्रस्ताव वापस लेने, 300 यूनिट तक किसानों को मुफ्त बिजली देने की मांग करेंगे।