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निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी से चार गुना महंगी

Tue, 26 Mar 2019 01:27 AM IST
manoj tiwari न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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NCERT
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लखनऊ। नए शैक्षिक सत्र के लिए जहां किताबों की मंडी सजने लगी है, वहीं अभिभावकों की जेब ढीली होने लगी है। निजी प्रकाशकों की किताबें एनसीईआरटी की किताबों से चार गुना तक महंगी बिक रही हैं। मगर ज्यादातर स्कूलों ने निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने के निर्देश जारी कर दिए हैं। अलग-अलग विद्यालयों की ओर से विभिन्न निजी प्रकाशकों की किताबों की सिफारिशों के चलते इनकी कीमतें आसमान छू रही हैं। एनसीईआरटी की जो किताब 100 रुपये में मिलती है, उसी विषय की निजी प्रकाशक की किताब का दाम 400 रुपये से भी ज्यादा है।
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सभी मुख्य विषयों की एनसीईआरटी की एक सेट की किताबों का दाम 300 रुपये तक आ रहा है, वहीं उसी सेट की निजी प्रकाशकों की किताबों का दाम तीन हजार रुपये से भी ज्यादा पड़ रहा है। अभिभावकों को एक सेट के लिए दस गुना ज्यादा दाम चुकाने पड़ रहे हैं। निजी प्रकाशकों के लिए ओपन मार्केट होने की वजह से इनके शुल्क पर किसी भी प्रकार का नियंत्रण नहीं है। इसी बात का फायदा निजी प्रकाशक उठा रहे हैं। एक सेट की किताब के लिए अभिभावकों को दस गुने से भी ज्यादा दाम चुकाना पड़ रहा है।

इस तरह से दामों में फर्क
कक्षा 9 की मैथ्स की एनसीईआरटी की किताब जहां 130 रुपये की है, वहीं निजी प्रकाशकों की किताबें 420 रुपये और 450 रुपये की हैं। इसके अलावा एक अन्य किताब की कीमत 410 रुपये है। आठवीं क्लास की गणित की एनसीईआरटी की किताब की कीमत 50 रुपये है। वहीं निजी प्रकाशकों की किताबें 460 रुपये, 300 रुपये और 350 रुपये है। इसी प्रकार कक्षा 6 की अंग्रेजी की एनसीईआरटी की किताब की कीमत महज 50 रुपये है। वहीं निजी प्रकाशक की इंग्लिश की किताब 310 रुपये और 270 रुपये है। कक्षा एक से लेकर कक्षा आठवीं तक की एनसीईआरटी की सभी किताबों के दाम 50 रुपये ही निर्धारित हैं। जबकि निजी प्रकाशकों की किताबें 250 रुपये से लेकर 550 रुपये तक हैं। कई स्कूलों ने अपने यहां एक ही विषय की निजी प्रकाशकों की दो-दो किताबें लागू की हैं।
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कमीशन के खेल से भी इनकार नहीं
निजी प्रकाशकों की किताबें लागू करने के पीछे कमीशन के खेल से भी इनकार नहीं किया जा सकता। सूत्र बताते हैं कि निजी प्रकाशक अपनी किताबों को लागू कराने के लिए जहां विद्यालयों को कमीशन देते हैं, वहीं विद्यालय निर्धारित दुकान से किताबें खरीदने के लिए दुकानदारों से कमीशन वसूलते हैं। ऐसे में विद्यालयों को दो तरफा कमीशन मिलता है। एक अनुमान के मुताबिक विद्यालयों को 10 से 30 फीसदी तक कमीशन मिलता है। स्कूल अभिभावकों को किताबों की लिस्ट थमा रहे हैं और मौखिक तौर पर बता रहे हैं कि उनको किस दुकान से किताबें खरीदनी हैं। अभिभावकों को निर्धारित दुकानों से किताबें खरीदने पर छूट नहीं मिलती है। खुले बाजार में किसी भी दुकान से यदि वे किताब खरीदें तो उन्हें 20 प्रतिशत तक की छूट मिलती है।
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