अभी कैदियों के बीमार होने पर विभिन्न जेलों से सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं से जुड़े परामर्श के लिए उन्हें चिकित्सा संस्थानों में भेजा जाता है। ऐसे में कई बार कैदी भागने में सफल हो जाते हैं। इस समस्या को देखते हुए लखनऊ सहित कई जेलों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत टेली मेडिसिन की सुविधा शुरू की गई थी।
कैदियों को बीमार होने पर अब चिकित्सा संस्थानों में नहीं ले जाया जाएगा। इन्हें जेल के अस्पताल से ही टेली मेडिसिन के जरिए चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञों से परामर्श मिलेगा। यह कवायद अक्सर इलाज के लिए चिकित्सा संस्थानों में ले जाने के दौरान कैदियों के फरार होने की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए हो रही है।
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अभी कैदियों के बीमार होने पर विभिन्न जेलों से सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं से जुड़े परामर्श के लिए उन्हें चिकित्सा संस्थानों में भेजा जाता है। ऐसे में कई बार कैदी भागने में सफल हो जाते हैं। इस समस्या को देखते हुए लखनऊ सहित कई जेलों में पायलट प्रोजेक्ट के तहत टेली मेडिसिन की सुविधा शुरू की गई थी। इसके सकारात्मक नतीजे सामने आने के बाद अब इस व्यवस्था को पूरे प्रदेश में लागू किया जा रहा है।
प्रमुख सचिव स्वास्थ्य जी पार्थ सारथी सेन शर्मा ने इस संबंध में महानिदेशक (जेल) को पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने जेल अस्पतालों में टेली मेडिसिन की सुविधा मुकम्मल कराने को कहा है। हर जिले की जेल में टेली मेडिसिन की सुविधा होने के बाद उन्हें अलग-अलग चिकित्सा संस्थानों से जोड़ा जाएगा जिससे जरूरत पर चिकित्सा संस्थानों के विशेषज्ञ कैदियों को परामर्श दे सकें।