लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने इमरजेंसी में लाए गए लोगों समेत बेघर व बेसहारा लोगों को समुचित इलाज मुहैया कराने के मामले में राजधानी के सभी सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य व चिकित्सा सुविधाओं का सर्वे कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को शहर के सभी सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधाओं का निरीक्षण करवाकर यह रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया कि मानक स्तर पर चिकित्सा सुविधाओं को किस तरह से उच्चीकृत और इनकी निगरानी की जाती है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई आठ मई को नियत की है।
न्यायमूर्ति ए आर मसूदी और न्यायमूर्ति अजय कुमार श्रीवास्तव प्रथम की खंडपीठ ने यह आदेश ज्योति राजपूत की जनहित याचिका पर दिया। याचिका में मंदिरों, अस्पतालों, फुटपाथों आदि के पास रहने वाले बेघर, बेसहारा, मानसिक मंदित लोगों की पीड़ा के मुद्दे को उठाया गया है। याची ने ऐसे लोगों के समुचित इलाज समेत शरण देने के निर्देश जारी करने की गुजारिश की है। साथ ही इमरजेंसी में इलाज को लाए गए लोगों का मुद्दा भी उठाया है। याची ने ऐसे कई मामलों का हवाला देकर बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराए गए एक बेसहारा मरीज का ब्योरा पेश किया। याची का कहना था कि इमरजेंसी में लाए गए लोगों समेत बेसहारा मरीजों को तत्काल, समुचित इलाज मुहैया कराने में सरकारी अस्पतालों में लापरवाही हो रही है। कोर्ट ने कहा इस मामले में राज्य के स्तर पर जांच की जरूरत है।
कोर्ट ने कहा अस्पतालों में सेवाओं, उपकरणों व स्टाफ की उपलब्धता की जांच के बाद इसकी रिपोर्ट पेश की जाए। कोर्ट ने मरीजों के चिकित्सा वार्डों में सफाई की भी उच्च स्तर से जांच के बाद 4 हफ्ते में इसकी स्थिति रिपोर्ट निजी हलफनामे पर तलब की है। कोर्ट ने सरकारी अस्पतालों में दी जा रही आपात सेवाओं में स्ट्रेचर, व्हील चेयर्स, मुफ्त दवा आदि की स्थिति पर भी गंभीर सरोकार जताया है। साथ ही कहा कि पैथलोजी, रक्त चढ़ाने आदि के मुद्दों पर भी तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। (संवाद)