बढ़ती महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़कर रख दी है। महंगाई का सबसे अधिक असर घर की रसोई पर पड़ रहा है। दाल के बढ़ते दामों ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में अब थाली से दाल गायब होने लगी है। आंकड़ों पर गौर करें तो दाल के दाम में हर माह लगभग पांच से 10 रुपये बढ़ोत्तरी हो रही है।
कोरोना काल में लॉकडाउन के चलते दिक्कतों का सामना कर रहे लोगों पर महंगाई की दोहरी मार पड़ी है। दाल और सब्जी के बढ़ते दामों ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं हैं। हालात ये हैं कि पिछले दो-तीन महीने से दाल और तेल के दामों में बढ़ोत्तरी होती जा रही है। दाल के साथ सरसों का तेल व रिफांइड भी महंगा होता जा रहा है। बढ़ती महंगाई से आम आदमी, मजदूर, किसान व मध्यम वर्गीय लोग परेशान हैं। व्यापारी नवीन कोटवानी का कहना है कि खाद्य तेल में मिलावट पर सख्ती और कंपनियों पर लगाम के कारण भी दाम पर असर पड़ा है। किराना व्यवसायी मनोज शर्मा का कहना है कि दाल के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। उम्मीद है कि सरकार इस पर अंकुश लगाने के लिए जल्द कोई रास्ता निकालेगी।
गृहणियों का छलका दर्द
शहर के डिगिहा निवासी वंदना श्रीवास्तव ने बताया कि दाल और सब्जी के दाम में तेजी से रसोई का जायका बिगड़ रहा है। परिजनों की पसंद का खाना बनाना मुश्किल हो गया है। सभी सब्जियां और दाल महंगी होती जा रही हैं। छावनी निवासी गृहणी प्रिया कहती हैं कि कोरोना और लॉकडाउन ने पहले ही कारोबार ठप कर दिया है। बमुश्किल हालात संभालने की कोशिश की जा रही थी। ऐसे में अचानक से तेल और दाल के दाम बढ़ने से नई दिक्कत पैदा हो रही है।
बढ़ते दाम पर एक नजर
दाल दिसंबर जनवरी फरवरी
अरहर 100 105 110
उड़द 162 165 170
मूंग 115 115 120
कड़वा तेल 130 140 150
रिफाइंड 110 130 135
नोट- दाल के दाम किलो में व तेल के दाम लीटर में हैं। ये फुटकर रेट के आंकड़े हैं।