पांच से दस प्रतिशत तक छूट देने के बाद भी फ्लैटों की बिक्री में इजाफा नहीं होने पर आवास विकास परिषद (आविप) अब कीमतों में और कमी करने की तैयार कर रहा है। इस संबंध में उच्च स्तर पर तेजी से मंथन चल रहा है। आविप की प्रदेश भर में करीब 35 अरब रुपये की दस हजार आवासीय संपत्तियां खाली पड़ी हैं। रियल एस्टेट कारोबार में पांच साल से चल रही मंदी के कारण परिषद को कई लुभावनी योजनाएं भी लांच करनी पड़ी।
लाटरी की बजाए पहले आओ पहले पाओ और साठ दिन में एकमुश्त भुगतान पर दो प्रतिशत छूट पांच प्रतिशत की गई। इस पर भी जब बिक्री नहीं बढ़ी तो बीते साल बोर्ड में प्रस्ताव लाकर मांग के आधार पर अलग-अलग योजनाओं में पांच से दस प्रतिशत तक और छूट दी गई। इसके बाद भी फ्लैटों की बिक्री में इजाफा नहीं हुआ। इस पर परिषद कीमतों में 10 से 20 प्रतिशत तक और कमी करने की तैयारी में है।
फिर खोलना पड़ा प्लाटों का आवंटन
पिछले 15 साल से परिषद जमीन न होने पर फ्लैट बनाने का तर्क दे रहा था, लेकिन मंदी से उबरने के लिए अविप पिछले छह महीने में अवध विहार योजना में दो बार प्लाटों का पंजीकरण खोल चुका है।
एलडीए का भी यही हाल
परिषद की तरह एलडीए ने भी बसंत कुंज योजना में प्लाटों के आवंटन के लिए पंजीकरण खोले हैं। इतना ही नहीं दोनों विभाग फ्लैटों की नई योजनाओं को लाने पर चार साल पहले रोक भी लगा चुके हैं।
तीस लाख से एक करोड़ तक के हैं फ्लैट
परिषद के खाली पड़े फ्लैट की कीमतें तीस लाख रुपये से लेकर एक करोड़ कीमत तक के हैं। राजधानी की वृंदावन में एवरेस्ट योजना में खाली पड़े फ्लैट एक करोड़ रुपये कीमत के हैं। इसी तरह अवध विहार योजना में भागीरथी व मंदाकिनी में 70 लाख रुपये कीमत के काफी फ्लैट खाली हैं। इसके अलावा अन्य योजनाओं में भी फ्लैट रिक्त हैं।