क्रियान्वयन की कमी से डूबते हैं 80% व्यवसाय
जयपुरिया प्रबंधन संस्थान में मशहूर कंसलटेंट प्रो. राम चरन का व्याख्यान
किसी व्यवसाय में योजना बनाने से कहीं अधिक अहम उसका क्रियान्वयन होता है। 80 फीसदी व्यवसाय योजनाओं की कमी के बजाय उनके क्रियान्वयन की खामी से डूबते हैं। इसलिए कंपनी के लीडर को कियान्वयन पर ज्यादा समय देना चाहिए। मशहूर कंसलटेंट प्रो. राम चरन ने शुक्रवार को जयपुरिया प्रबंधन संस्थान में आयोजित विशेष व्याख्यान में भावी प्रबंधकों को यह सीख दी। इस मौके पर उन्होंने विद्यार्थियों से अपने शुरुआती दिनों की यादें भी साझा कीं।
प्रो. रामचरण ने कहा कि किसी भी व्यवसाय की सफलता का मंत्र है कि ‘सही लोगों को सही काम दिया जाए’। व्यवसाय को सफल बनाने के लिए सबसे पहले लक्ष्य निर्धारित करें। यह लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिए कि आखिर उससे क्या आशा करते हैं। इसके बाद कार्ययोजना बनाई जानी चाहिए। कार्ययोजना में डायरेक्टली रिस्पॉन्सिबल इंडिविजुअल्स (डीआरआई) का पालन करना जरूरी है। इसमें यह तय होता है कि किस काम के लिए कौन जिम्मेदार है। काम की जिम्मेदारी देने के साथ ही ‘की परफॉर्मेंस इंडिकेटर्स’ (केपीटी) का निर्धारण होना चाहिए। इसमें हर व्यक्ति के काम के स्तर की गणना होती है। हर सप्ताह इसका आंकलन होना चाहिए। इसके माध्यम से ही पारिश्रमिक और पुरस्कार निर्धारित होना चाहिए। कोई समस्या आने पर एक साथ बैठकर उस पर चर्चा करनी चाहिए, लेकिन इस चर्चा में अनुशासन का स्तर बरकरार रहे। इस दौरान शहर की जानी-मानी हस्तियां, उद्योगपति, प्रशासनिक अधिकारी और वरिष्ठ पत्रकार मौजूद रहे। जयपुरिया प्रबंधन संस्थान के अध्यक्ष शरद जयपुरिया, उपाध्यक्ष श्रीवत्स जयपुरिया व संस्थान कि निदेशक डॉ. कविता पाठक ने प्रो. राम चरन का आभार व्यक्त किया।
ग्राहकों के लिए करें अविष्कार
प्रो. राम चरन के अनुसार कंपनी का कर्तव्य है कि वह अपने ग्राहकों के लिए नये-नये अविष्कार करे। इसी से कंपनी और बेहतर काम कर पाती है। अमेजॉन, उबर और नेटफ्लिक्स ने यही काम करके दिखाया है। कंपनी कितनी अच्छी है यह उसके प्रति ग्राहकों के विश्वास से पता चलता है। एक ग्राहक जब बार-बार उसका उत्पाद खरीदता है तो यह उसके प्रति होने वाले विश्वास को बताता है। कंपनी का सबसे बड़ा विज्ञापन उसके ग्राहक ही करते हैं। एक बार जब ग्राहक विज्ञापन करना शुरू कर देते हैं तो बाकी सभी विज्ञापन पीछे छूट जाते हैं।