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Lucknow News: प्रशासन पर अमल दरामद दर्ज करने का दबाव

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लखनऊ। सरोजनीनगर के नटकुर ग्रामसभा की बेशकीमती 35 बीघा जमीन का मामला दशकों से उलझता ही जा रहा है। राजस्व परिषद की ओर से जमीन को सोसाइटी के नाम दिए जाने का मामला फिर से उछल गया है, जिसके बाद अब प्रशासन पर आदेश लागू कराने के दबाव की भी बात सामने आई है। राजस्व परिषद की ओर से मामले में अब तहसील प्रशासन के कार्यवाही न करने पर रिपोर्ट तलब की गई है। उधर, जिला प्रशासन की ओर से राजस्व परिषद के फैसले के खिलाफ अपील भी की गई है।
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जिला प्रशासन की ओर से अपील में बताया गया है कि जिस 35 बीघा जमीन पर आजाद एजुकेशनल सोसाइटी दावा कर रही है, वह जमीन चरागाह की सुरक्षित श्रेणी में दर्ज है। दरअसल, दो साल पहले जब सरोजनीनगर के तत्कालीन एसडीएम सचिन वर्मा ने इसे सरकारी खाते में दर्ज कराया तो सोसाइटी की ओर से अपर आयुक्त कार्यालय में अपील दाखिल की गई, मगर अपर आयुक्त ने भी सरकारी रिकॉर्ड का हवाला देते हुए एसडीएम के फैसले को बहाल कर दिया था, जिसके बाद सोसाइटी राजस्व परिषद में चली गई थी। सुनवाई के बाद अब परिषद ने सोसाइटी के हक में जमीन का फैसला दिया, जिसके बाद जिला प्रशासन ने कानूनी प्रक्रिया के तहत राजस्व परिषद में अपील दायर की है।
उधर, यह भी बताया गया कि मामले में प्रशासन पर अमल दरामद करने का भी दबाव है। सूत्रों के मुताबिक, गड़बड़ी के बावजूद मामले में कार्यवाही न करने पर तहसील प्रशासन से रिपोर्ट भी तलब की गई है।
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सिर्फ 35 बीघा तक नहीं सीमित है मामला
करीब 100 करोड़ की 35 बीघा जमीन का यह मामला काफी पुराना और पेचीदा है। दरअसल, यह मामला सिर्फ 35 बीघा तक सीमित नहीं है, बल्कि 80 के दशक का है, जब यहां करीब 100 बीघा सरकारी जमीन पर हेरफेर की कोशिश की गई थी। जांच में राजस्व रिकॉर्ड में सरकारी जमीन के सभी इंद्राज फर्जी और कूटरचित पाए गए थे, जिसके बाद तत्कालीन एसडीएम सदर ने 1982, 1988 में सभी भूमियों को पहले की तरह ही ग्राम समाज के खातों में दर्ज करने का आदेश दिया था। तब सभी इंद्राज शून्य हो गए थे। इसके बाद खातेदारों ने चेयरमैन बोर्ड ऑफ रेवेन्यू में अपील दाखिल की थी, जिस पर राजस्व परिषद ने 1991 में तीन अलग अलग आदेश जारी कर पूर्व में पारित निर्णयों को स्थगित कर दिया था। इसके बाद सरकारी जमीन पर भूमाफियाओं के संरक्षण में अवैध कब्जा होता रहा। दो साल पहले 14 अगस्त 2023 को सरोजनीनगर के तत्कालीन एसडीएम ने चरागाह की 35 बीघा जमीन तो वापस सरकारी खाते में दर्ज करा दी, लेकिन इस पर से अवैध कब्जा नहीं हटाया जा सका।
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